New start Agreement: परमाणु शक्ति संतुलन पर लगा ब्रेक, यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की चेतावनी

खबर सार :-
‘न्यू स्टार्ट’ संधि की समाप्ति ने दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की कमी गंभीर खतरा बन सकती है। यूएन प्रमुख की चेतावनी यह साफ करती है कि अब अमेरिका और रूस पर बड़ी जिम्मेदारी है। यदि दोनों देश बातचीत से नई व्यवस्था नहीं बनाते, तो वैश्विक शांति पर संकट और गहरा सकता है।

New start Agreement: परमाणु शक्ति संतुलन पर लगा ब्रेक, यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की चेतावनी
खबर विस्तार : -

New start Agreement: संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियार नियंत्रण से जुड़ी ‘न्यू स्टार्ट’ संधि की अवधि समाप्त होने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक “गंभीर क्षण” करार दिया। गुटेरेस के अनुसार, यह स्थिति वैश्विक स्थिरता के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि अब दुनिया ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है जहां दो सबसे बड़े परमाणु शक्तिशाली देशों के हथियारों पर कोई कानूनी और बाध्यकारी सीमा नहीं रहेगी।

पांच दशक बाद पहली बार ऐसा दौर

गुटेरेस ने कहा कि पिछले 50 वर्षों से अधिक समय में यह पहली बार हो रहा है जब अमेरिका और रूस के रणनीतिक परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली कोई प्रभावी संधि अस्तित्व में नहीं होगी। ये दोनों देश मिलकर दुनिया के अधिकांश परमाणु हथियारों के भंडार के मालिक हैं। ऐसे में इन पर नियंत्रण की कमी पूरी मानवता के लिए खतरे की घंटी है।

क्या थी ‘न्यू स्टार्ट’ संधि

‘न्यू स्टार्ट’ संधि अमेरिका और रूस के बीच तैनात रणनीतिक परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाली प्रणालियों—जैसे मिसाइल और बमवर्षक—की संख्या सीमित करती थी। यह संधि वर्ष 2011 में लागू हुई थी और गुरुवार को इसकी अवधि समाप्त हो रही है। लंबे समय तक यह संधि दोनों देशों के बीच हथियार नियंत्रण की आखिरी बड़ी कड़ी बनी रही।

शीत युद्ध से मिली स्थिरता की सीख

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने याद दिलाया कि शीत युद्ध के दौरान और उसके बाद के वर्षों में अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियार नियंत्रण समझौतों ने दुनिया को कई बड़े संकटों से बचाया। इन समझौतों से न सिर्फ रणनीतिक स्थिरता बनी रही, बल्कि गलत आकलन या तकनीकी चूक से होने वाली विनाशकारी घटनाओं को भी रोका जा सका। सबसे अहम बात यह रही कि इन प्रयासों के चलते दोनों देशों ने अपने भंडार से हजारों परमाणु हथियारों में कटौती की।

वैश्विक सुरक्षा को मिला लाभ

गुटेरेस के अनुसार, रणनीतिक हथियार नियंत्रण से पूरी दुनिया की सुरक्षा मजबूत हुई है, खासकर अमेरिका और रूस की जनता के लिए। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल दो देशों के हित में नहीं थी, बल्कि इसका सकारात्मक असर वैश्विक शांति पर भी पड़ा।

परमाणु खतरे के सबसे खराब दौर में समाप्ति

यूएन महासचिव ने चेताया कि ‘न्यू स्टार्ट’ की समाप्ति ऐसे समय पर हो रही है जब दशकों में पहली बार परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा सबसे अधिक है। उन्होंने कहा, “इससे खराब समय और कोई नहीं हो सकता।” हालांकि, उन्होंने उम्मीद की कि इस अनिश्चितता के दौर में भी सकारात्मक रास्ता निकाला जा सकता है।

रीसेट का अवसर या नई होड़ की शुरुआत

गुटेरेस ने कहा कि यह समय हथियार नियंत्रण व्यवस्था को “रीसेट” करने का अवसर भी हो सकता है, ताकि तेजी से बदलते वैश्विक हालात के अनुरूप एक नई और प्रभावी व्यवस्था बनाई जा सके। उन्होंने इस बात का स्वागत किया कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने माना है कि परमाणु हथियारों की होड़ दुनिया को अस्थिर करती है और इसे रोकना जरूरी है।

ठोस कदमों की मांग

यूएन प्रमुख ने कहा कि अब दुनिया केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस कदमों की उम्मीद कर रही है। उन्होंने अमेरिका और रूस से बिना देरी किए बातचीत की मेज पर लौटने और ऐसी नई संधि पर सहमत होने की अपील की, जिसमें परमाणु हथियारों पर जांच योग्य सीमाएं हों, जोखिम कम किया जा सके और वैश्विक सुरक्षा को मजबूती मिले।

कमजोर पड़ता हथियार नियंत्रण ढांचा

गौरतलब है कि ‘न्यू स्टार्ट’ संधि अमेरिका और रूस के बीच आखिरी बड़ी हथियार नियंत्रण संधि थी। इससे पहले अमेरिका वर्ष 2019 में इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस (INF) संधि से बाहर निकल चुका है। ऐसे में न्यू स्टार्ट का अंत वैश्विक परमाणु सुरक्षा ढांचे को और कमजोर बनाता नजर आ रहा है।

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