UAE President India Visit: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार को भारत के संक्षिप्त लेकिन बेहद अहम दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। उनके आगमन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए खुद हवाईअड्डे पहुंचकर स्वागत किया। दोनों नेताओं की गर्मजोशी उस वक्त साफ नजर आई, जब पीएम मोदी ने उन्हें “अपना भाई” बताते हुए गले लगाया और एक ही कार में उनके साथ रवाना हुए।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “मैं अपने भाई, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का स्वागत करने के लिए एयरपोर्ट गया। उनकी यह यात्रा भारत–यूएई की गहरी दोस्ती को दर्शाती है। मैं हमारी बातचीत को लेकर उत्सुक हूं।” यह बयान सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसे और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है।
बतौर राष्ट्रपति यह शेख मोहम्मद बिन जायद की भारत की तीसरी आधिकारिक यात्रा है, जबकि बीते दस वर्षों में यह उनका पांचवां भारत दौरा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष निमंत्रण पर हुई है। खास बात यह रही कि यूएई राष्ट्रपति का यह दौरा महज डेढ़ से दो घंटे का था, फिर भी इसके कूटनीतिक निहितार्थ काफी व्यापक माने जा रहे हैं।
यूएई राष्ट्रपति सोमवार शाम करीब 4:30 बजे दिल्ली पहुंचे। लगभग 4:45 बजे प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक शुरू हुई, जो करीब 6 बजे तक चली। इसके तुरंत बाद वे भारत से रवाना हो गए। इस सीमित समय में व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, ऊर्जा, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक राजनीति से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

शेख मोहम्मद बिन जायद का भारत दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब वैश्विक राजनीति में अस्थिरता चरम पर है। अमेरिका, चीन और रूस के बीच तनाव, ईरान में बिगड़ते हालात, गाजा संकट और पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच भारत-यूएई नेताओं की मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा यूएई और सऊदी अरब के बीच उभरे मतभेदों के बीच भारत की संतुलित कूटनीति पर भी अंतरराष्ट्रीय नजरें टिकी हुई हैं।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100.06 अरब डॉलर को पार कर गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 19.6 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। इस उपलब्धि के साथ यूएई, भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है। व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) इस तेजी का प्रमुख आधार माना जा रहा है।
यूएई भारत में सातवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है। वर्ष 2000 से अब तक भारत में यूएई से 22 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आ चुका है। ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के संबंधों की रीढ़ बना हुआ है। यूएई भारत को कच्चे तेल के साथ-साथ लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की भी आपूर्ति करता है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलती है।

भारत और यूएई के बीच रक्षा सहयोग भी लगातार मजबूत हो रहा है। इसी महीने की शुरुआत में थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने यूएई का दौरा किया था, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने यूएई सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और रक्षा उद्योग में सहयोग पर चर्चा की।
दिसंबर में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी यूएई का दौरा किया था। इस दौरान 16वीं भारत–यूएई संयुक्त आयोग बैठक और रणनीतिक संवाद का पांचवां दौर आयोजित हुआ। इन बैठकों में दोनों देशों ने भविष्य की साझेदारी के रोडमैप पर सहमति जताई थी।
भारत और यूएई के रिश्तों की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यूएई के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, सम्मान और दीर्घकालिक साझेदारी का प्रतीक माना जाता है।
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