नई दिल्लीः आगामी विधानसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु की राजनीति में सबसे अहम माने जा रहे डीएमके-कांग्रेस गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। सीट बंटवारे को लेकर औपचारिक बातचीत शनिवार से शुरू हो गई। यह बैठक चेन्नई स्थित द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के मुख्यालय अन्ना अरिवलयम में आयोजित की गई, जहां दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं ने आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा की।
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के. सेल्वा पेरुंथगई ने पुष्टि की कि पार्टी की ओर से चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इस बातचीत में शामिल हुआ। इस दल में वे स्वयं, एआईसीसी प्रभारी गिरीश चोडंकर, सह-प्रभारी निवेदित अल्वा और कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता राजेश कुमार शामिल रहे। कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक उपस्थिति को मजबूत करने के लिए सम्मानजनक सीटों की अपेक्षा रखती है।
दूसरी ओर, डीएमके की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पार्टी के कोषाध्यक्ष टी.आर. बालू ने किया। उनके साथ मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन द्वारा नियुक्त सात सदस्यीय समिति भी मौजूद रही। बैठक में सीटों के बंटवारे के साथ-साथ सहयोगी दलों के समायोजन और चुनावी तालमेल जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने विधानसभा की 35 से अधिक सीटों के साथ राज्यसभा की दो सीटों की मांग रखी है। हालांकि, डीएमके ने अब तक लगभग 25 विधानसभा सीटें और राज्यसभा की एक सीट देने की पेशकश की है, जिसे अधिकतम 27 या 28 सीटों तक बढ़ाने की संभावना जताई गई है। सीटों की संख्या को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद पहले भी सामने आ चुके हैं। बताया जाता है कि गिरीश चोडंकर और डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि के बीच हुई अनौपचारिक बातचीत इसी मुद्दे पर ठहर गई थी।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि यदि डीएमके के साथ समझौता कांग्रेस की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हुआ तो पार्टी अन्य विकल्पों पर विचार कर सकती है। इनमें अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के साथ अनौपचारिक संपर्क की संभावनाएं भी शामिल बताई जा रही हैं। हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से इस तरह की अटकलों पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है।
बातचीत से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि डीएमके को अपने कई मौजूदा सहयोगियों और संभावित नए साझेदारों को भी समायोजित करना है। ऐसे में 35 से अधिक सीटों की मांग पूरी करना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा। डीएमके का मानना है कि गठबंधन की मजबूती सीटों की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण है और सभी दलों को संतुलित प्रतिनिधित्व देना जरूरी है।
कांग्रेस ने इस बार सरकार में हिस्सेदारी की अपनी पूर्व मांग से पीछे हटते हुए केवल सीटों के अधिक आवंटन पर जोर दिया है। इसके अलावा पार्टी ने स्थानीय निकायों, नगर निगमों, मंदिर बोर्डों और विभिन्न कल्याण बोर्डों में भी अधिक प्रतिनिधित्व की मांग की है। डीएमके नेताओं ने संकेत दिया है कि इन मांगों पर उचित समय पर विचार किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों दलों के लिए यह गठबंधन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। डीएमके राज्य में सत्तारूढ़ दल है और वह अपने नेतृत्व में व्यापक गठबंधन बनाए रखना चाहती है, जबकि कांग्रेस तमिलनाडु में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने के अवसर के रूप में इन वार्ताओं को देख रही है।
औपचारिक बातचीत की शुरुआत के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों पार्टियां लंबे समय से चले आ रहे गठबंधन को बनाए रखने की इच्छुक हैं। हालांकि सीटों को लेकर खींचतान जारी है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि चुनावों से पहले एक संतुलित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समझौता सामने आएगा, जो राज्य की राजनीतिक दिशा को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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