Karnataka Next Chief Minister : कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एच.के. पाटिल ने स्पष्ट किया कि डीके शिवकुमार पहले से ही मुख्यमंत्री पद के नामित उम्मीदवार हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद पार्टी की आंतरिक प्रक्रिया पूरी होने के साथ शिवकुमार शपथ ग्रहण करेंगे।
कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एचके पाटिल ने कहा, “शिवकुमार पहले से ही मुख्यमंत्री पद के नामित उम्मीदवार हैं। जब सिद्धारमैया ने अपने विचार साझा किए थे और दिल्ली में हुई चर्चाओं के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि शिवकुमार ही अगले मुख्यमंत्री होंगे। लेकिन हमें प्रक्रिया का पालन करना है। कल शाम चार बजे कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई है, जिसमें हाईकमान के फैसले को औपचारिक रूप दिया जाएगा। शिवकुमार परसों या उसके एक दिन बाद शपथ ग्रहण कर सकते हैं।
ओबीसी समुदाय से संबंधित एक सवाल के जवाब में पाटिल ने कहा कि यह प्रश्न उचित नहीं है। उन्होंने शिवकुमार को ओबीसी हितों का समर्थक बताते हुए कहा, “शिवकुमार उन लोगों में शामिल हैं जो ओबीसी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एक तरह से उनका भी ओबीसी समुदाय से जुड़ाव है। इसलिए ऐसे सवाल न तो उठेंगे और न ही प्रासंगिक होंगे।
सिद्धारमैया के इस्तीफे पर पाटिल ने इसे ऐतिहासिक और पार्टी के प्रति गहरी निष्ठा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “इस फैसले का निश्चित रूप से सकारात्मक असर पड़ेगा। सिद्धारमैया का कद और बढ़ गया है। कल उनका फैसला पार्टी और उच्च नेतृत्व के प्रति वफादारी का शानदार इजहार था, जिसने कई विरोधियों को भी हैरान कर दिया। बड़े नेता होते हुए भी उन्होंने जो निर्णय लिया, वह उनके राजनीतिक अनुभव के अनुरूप है।
एचके पाटिल ने किसी भी पद की आकांक्षा से इनकार किया। उन्होंने कहा, “मैं किसी पद का आकांक्षी नहीं हूं। मेरी सेवाएं हमेशा कांग्रेस पार्टी के आलाकमान के निर्देश पर उपलब्ध रहेंगी। सिद्धारमैया के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर पाटिल ने बताया कि वे केंद्र की राजनीति में जाने के इच्छुक नहीं हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया और राज्य की राजनीति में बने रहने की इच्छा जताई।
पाटिल ने विश्वास जताया कि कांग्रेस पार्टी और राज्य में उनके अनुभव के अनुरूप एक उपयुक्त जिम्मेदारी जरूर दी जाएगी। यह बदलाव कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चले आ रहे सिद्धारमैया-शिवकुमार गुट के समीकरण को नया मोड़ दे रहा है। सिद्धारमैया के इस्तीफे को पार्टी की एकजुटता और अनुशासन का उदाहरण माना जा रहा है, जबकि शिवकुमार के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की तैयारी तेज हो गई है।
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