कोलकाताः तृणमूल कांग्रेस में गुरुवार को एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और कोलकाता नगर निगम के पार्षद अरूप चक्रवर्ती ने पार्टी प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को भेजे एक ईमेल में व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से हटने की जानकारी दी। इससे पहले पूर्व राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता शांतनु सेन भी पार्टी प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे चुके हैं। लगातार हो रहे इन इस्तीफों ने तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी हालात को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
अरूप चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे में पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें प्रवक्ता के रूप में जो जिम्मेदारी दी गई थी, उसे उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ निभाने की कोशिश की। उन्होंने लिखा कि प्रवक्ता के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने हमेशा पार्टी की विचारधारा, मूल्यों और सिद्धांतों को जनता तथा मीडिया के सामने प्रभावी ढंग से रखने का प्रयास किया।
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले बुधवार को अरूप चक्रवर्ती ने कोलकाता नगर निगम (केएमसी) की लेखा समिति के सदस्य पद से भी इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपना इस्तीफा केएमसी आयुक्त स्मिता पांडेय को सौंपा। इसके बाद गुरुवार दोपहर करीब एक बजे उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी को ईमेल भेजकर पार्टी प्रवक्ता पद छोड़ने की औपचारिक घोषणा कर दी।
अरूप चक्रवर्ती कोलकाता नगर निगम के वार्ड संख्या 98 के पार्षद हैं और लंबे समय से पार्टी के सक्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे किसी राजनीतिक मतभेद से इनकार करते हुए इसे निजी कारणों से लिया गया फैसला बताया है।
इसी दौरान तृणमूल कांग्रेस के एक अन्य पार्षद सुशांत घोष ने भी बरो नंबर 12 के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में अरूप चक्रवर्ती और सुशांत घोष दोनों ने अपने-अपने इस्तीफे कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम को भी सौंप दिए। हालांकि दोनों नेताओं ने साफ किया कि वे पार्षद पद से इस्तीफा नहीं दे रहे हैं और केवल निगम में अपने प्रशासनिक पदों से हटे हैं।
इन घटनाक्रमों के बीच अरूप चक्रवर्ती ने एक संवाददाता सम्मेलन में हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों को लेकर भी खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम पार्टी की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहे। उन्होंने कहा, “यह परिणाम अपेक्षित नहीं था, लेकिन जनता के फैसले को गंभीरता से स्वीकार करना होगा। यदि हम हार को स्वीकार नहीं कर सकते, तो हमारी पिछली जीत भी अर्थहीन हो जाती है।”
उन्होंने आगे कहा कि पार्टी कार्यकर्ता इस समय कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं और नेतृत्व को इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। अरूप चक्रवर्ती ने सवाल उठाते हुए कहा, “जो नेता लंबे समय तक मंत्री रहे, वे अब कहां हैं?” उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद शांतनु सेन ने भी गुरुवार को पार्टी प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा पत्र तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भेजा। शांतनु सेन ने अपने पत्र में कहा कि उन्होंने राज्य विधानसभा चुनावों में जनता के जनादेश को स्वीकार करते हुए यह फैसला लिया है।
हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इन इस्तीफों को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही हलचल के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इन घटनाओं पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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