क्यूबा-वेनेजुएला मुद्दे पर अमेरिका को लूला की दो टूक, बोले–“किसी देश का भविष्य बाहरी ताकत नहीं, वहां की जनता तय करेगी”

खबर सार :-
लूला दा सिल्वा के बयान ने अमेरिका और लैटिन अमेरिका के रिश्तों में नई तल्खी जोड़ दी है। क्यूबा और वेनेजुएला के समर्थन में खड़े होकर लूला ने स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्रीय राजनीति में संप्रभुता और आत्मनिर्णय सर्वोपरि है। यह बयान अमेरिका की विदेश नीति के लिए एक स्पष्ट और सख्त संदेश माना जा रहा है।

क्यूबा-वेनेजुएला मुद्दे पर अमेरिका को लूला की दो टूक, बोले–“किसी देश का भविष्य बाहरी ताकत नहीं, वहां की जनता तय करेगी”
खबर विस्तार : -

Cuba-US Dispute: लैटिन अमेरिका में अमेरिका की भूमिका को लेकर एक बार फिर तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल रही है। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने क्यूबा और वेनेजुएला के आंतरिक मामलों में अमेरिकी दखल पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी संप्रभु देश की समस्याओं का समाधान वहां के लोग स्वयं करेंगे, न कि कोई बाहरी शक्ति।

वर्कर्स पार्टी के मंच से अमेरिका पर निशाना

शनिवार को बहिया राज्य के साल्वाडोर शहर में वर्कर्स पार्टी की 46वीं वर्षगांठ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति लूला ने अमेरिका की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतिहास यह साबित करता है कि बाहरी हस्तक्षेप से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता, बल्कि देशों की आंतरिक स्थिरता कमजोर होती है।

क्यूबा के साथ ब्राजील की खुली एकजुटता

लूला ने अपने भाषण में क्यूबा के प्रति ब्राजील की एकजुटता को स्पष्ट रूप से जाहिर किया। उन्होंने कहा कि क्यूबा की जनता एक गंभीर मानवीय और आर्थिक संकट से गुजर रही है, जिसकी बड़ी वजह अमेरिकी प्रतिबंध और राजनीतिक दबाव हैं। लूला ने कहा, “हमारा देश क्यूबा के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। एक राजनीतिक दल और सरकार के रूप में हमारा दायित्व है कि हम उनके लिए सहयोग और सहायता के रास्ते तलाशें।”

अमेरिकी नीतियों से बढ़ी क्यूबा की मुश्किलें

ब्राजील के राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि क्यूबा की मौजूदा त्रासदी किसी एक सरकार की विफलता नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही अमेरिकी नीतियों और अटकलों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ता है, न कि सत्ता में बैठे लोगों पर।

वेनेजुएला पर भी लूला का सख्त संदेश

वेनेजुएला के मुद्दे पर लूला और भी स्पष्ट नजर आए। उन्होंने सीधे अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लेते हुए कहा, “वेनेजुएला की समस्या का समाधान वेनेजुएला के लोग खुद करेंगे, न कि संयुक्त राज्य अमेरिका या ट्रंप।” इस बयान को लैटिन अमेरिका में आत्मनिर्णय और संप्रभुता की मजबूत वकालत के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिका-क्यूबा वार्ता पर बढ़ा विवाद

इसी बीच अमेरिका और क्यूबा के बीच बातचीत को लेकर विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। गुरुवार को व्हाइट हाउस ने क्यूबा के नेतृत्व की ओर से जताई गई शंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीति के लिए तैयार हैं और दोनों देशों के बीच संवाद पहले से ही चल रहा है।

क्यूबा का जवाब: बिना शर्त बातचीत ही स्वीकार्य

हालांकि क्यूबा सरकार ने अमेरिका के इस दावे को नकार दिया है। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल ने कहा कि उनका देश अमेरिका से तभी बातचीत करेगा जब वह बिना दबाव, बिना शर्त, बराबरी के स्तर पर और संप्रभुता के सम्मान के साथ हो। क्यूबा सरकार का कहना है कि फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक बातचीत नहीं चल रही है।

व्हाइट हाउस की तीखी प्रतिक्रिया

इस पर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि क्यूबा सरकार अंतिम दौर में है और देश की स्थिति बेहद खराब है, इसलिए उसे अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ बयान देने में समझदारी दिखानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी दोहराया कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार रहते हैं और दावा किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत वास्तव में चल रही है।

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