अजित पवार: परिवार की जिम्मेदारियों से सत्ता के शिखर तक, जानिए एनसीपी नेता का पूरा राजनीतिक सफर

खबर सार :-
अजित पवार का राजनीतिक सफर पारिवारिक विरासत, व्यक्तिगत संघर्ष और प्रशासनिक अनुभव का मिश्रण रहा है। सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में खुद को एक प्रभावशाली और निर्णायक नेता के रूप में स्थापित किया। पवार परिवार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए अजित पवार राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे थे। ऐसे में पार्टी के समक्ष सक्षम नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया है।

अजित पवार: परिवार की जिम्मेदारियों से सत्ता के शिखर तक, जानिए एनसीपी नेता का पूरा राजनीतिक सफर
खबर विस्तार : -

Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र की राजनीति में अगर किसी नेता को तेज फैसलों, प्रशासनिक पकड़ और जमीनी राजनीति के लिए जाना जाता है, तो वह नाम है राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता अजित पवार। पवार परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले अजित पवार ने संघर्ष, अनुभव और रणनीति के दम पर खुद को राज्य की राजनीति में एक मजबूत चेहरे के रूप में स्थापित किया है। इस बीच बुधवार को हुए विमान हादसे में अजीत पवार की मौत ने महाराष्ट्र की राजनीति को बड़ी क्षति पहुंचाई है।

पवार परिवार का राजनीतिक बैकग्राउंड

अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देओलाली प्रवरा गांव में हुआ था। वे अनंतराव पवार के पुत्र और देश के वरिष्ठ राजनेता शरद पवार के भतीजे थे। शरद पवार का नाम न केवल महाराष्ट्र बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। ऐसे राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े अजित पवार को राजनीति की समझ बचपन से ही मिलने लगी थी। पवार परिवार का राजनीति, सहकारिता और सामाजिक क्षेत्र में गहरा प्रभाव रहा है। खासतौर पर सहकारी चीनी मिलों और ग्रामीण विकास से जुड़ी राजनीति में इस परिवार की मजबूत पकड़ मानी जाती है, जिसने अजित पवार के राजनीतिक आधार को और अधिक मजबूत बना दिया था।

परिवार: निजी जीवन में सीमित दायरा

अजित पवार के परिवार में उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और दो बेटे पार्थ पवार और जय पवार शामिल हैं। सुनेत्रा पवार कई मौकों पर उनके साथ राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में नजर आती रही हैं। बड़े बेटे पार्थ पवार ने राजनीति में कदम रखते हुए लोकसभा चुनाव भी लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पार्थ पवार को भविष्य की राजनीति के एक संभावित चेहरे के तौर पर देखा जाता है। अजित के छोटे बेटे जय पवार आम जनता के बीच राजनीतिक तौर पर अपेक्षाकृत कम जाने जाते थे, लेकिन परिवारिक तौर पर उन्हें हमेशा पिता के करीबी सहयोगी के रूप में देखा गया। अजित पवार के बेटे जय पवार की शादी रुतुजा पाटिल से हुई थी, जो एक नामी बिजनेसमैन की बेटी हैं। अजित पवार निजी जीवन में अपेक्षाकृत कम बोलने वाले और सीमित सार्वजनिक उपस्थिति वाले नेता माने जाते थे, लेकिन परिवार के प्रति उनकी नजदीकी और जिम्मेदारी हमेशा चर्चा में रही।

बड़े भाई एक प्रतिष्ठित व्यवसायी

अजित पवार का परिवार केवल उनके पत्नी और बच्चों तक ही सीमित नहीं था। उनके बड़े भाई श्रीनिवास पवार एक प्रतिष्ठित व्यवसायी हैं और दोनों भाइयों का आपसी रिश्ता बेहद मजबूत था। उनके परिवार में उनकी बहन विजया पाटिल भी शामिल हैं, जो परिवारिक और सामाजिक आयोजनों में सक्रिय रूप से जुड़ी रही हैं। राजनीतिक परिवार होने के नाते उनके चाचा शरद पवार महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता हैं और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक नेताओं में से एक हैं। शरद पवार के मार्गदर्शन और सहयोग ने अजित पवार के राजनीतिक जीवन को एक मजबूत आधार दिया। शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले उनकी बहन हैं।

शिक्षा अधूरी, जिम्मेदारियां पूरी

अजित पवार का जीवन आसान नहीं रहा। पिता के निधन के बाद उन्हें कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं, जिसके चलते उनकी पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी। हालांकि, यह कमी उनके राजनीतिक कौशल और प्रशासनिक समझ के आड़े नहीं आई। जमीनी अनुभव और व्यावहारिक सोच ने उन्हें एक प्रभावशाली नेता के रूप में उभारा। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

राजनीति में एंट्री: सहकारिता से शुरुआत

अजित पवार ने वर्ष 1982 में एक सहकारी चीनी मिल के बोर्ड सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। यह वही क्षेत्र था, जहां पवार परिवार की गहरी पकड़ मानी जाती है। इस दौर में उन्होंने ग्रामीण राजनीति, किसानों की समस्याओं और सहकारिता की कार्यप्रणाली को नजदीक से समझा। अपने चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में अजित पवार ने राजनीति की बारीकियां सीखीं और धीरे-धीरे एक स्वतंत्र पहचान बनानी शुरू की। उन्होंने अपनी राजनीतिक सूझ-बूझ और त्वरित फैसले लेने की प्रवृत्ति के कारण हमेशा सत्ता में अपनी उपस्थिति बनाए रखी।

विधायक से उपमुख्यमंत्री तक का सफर

अजित पवार पहली बार 1991 में बारामती विधानसभा सीट से विधायक बने। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और बार-बार इसी सीट से जीत दर्ज की। बारामती उनकी राजनीतिक कर्मभूमि बन गई, जहां उनका जनाधार बेहद मजबूत माना जाता है। आखिरकर बुधवार को बरामती में ही विमान की इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान हादसा हुआ और अजित पवार की मृत्यु हो गई। अजित पवार कई बार महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रहे और राज्य के उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली। वित्त मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को बजट प्रबंधन और विकास योजनाओं के लिए जाना जाता है। सिंचाई, कृषि और बुनियादी ढांचे से जुड़े फैसलों में उनकी सक्रिय भूमिका रही।

तेज-तर्रार और निर्णायक छवि

राजनीतिक गलियारों में अजित पवार को एक सख्त प्रशासक और तेज फैसले लेने वाले नेता के तौर पर जाना जाता है। वे विवादों से भी अछूते नहीं रहे, लेकिन उनके समर्थक उन्हें विकासोन्मुख और परिणाम देने वाला नेता मानते हैं। सत्ता समीकरणों को साधने की उनकी क्षमता उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है।

एनसीपी में अहम भूमिका

एनसीपी के भीतर अजित पवार हमेशा एक मजबूत शक्ति केंद्र के रूप में जाने जाते थे। राज्य में संगठनात्मक राजनीति से लेकर सत्ता में भागीदारी तक, उनकी भूमिका निर्णायक रही। वे शरद पवार के बाद पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे और महाराष्ट्र की राजनीति में उनका कद लगातार बढ़ रहा था। ऐसे समय में उनका जाना पार्टी, परिवार और राज्य के लिए अपूरणीय क्षति मानी जा रही है।

निजी जीवन और सार्वजनिक छवि

अजित पवार हमेशा अपने निजी जीवन को मीडिया की चकाचौंध से दूर रखना पसंद करते थे। सार्वजनिक और राजनीतिक गतिविधियों के बावजूद, उन्होंने अपने परिवार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को कभी नजरअंदाज नहीं किया। उनके करीबी और परिवारिक सहयोगियों का कहना था कि अजित पवार अपने बच्चों और पत्नी के साथ समय बिताने में विश्वास रखते थे और उनकी सलाह और मार्गदर्शन हमेशा उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रही। अजित पवार की मौत न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि महाराष्ट्र और पूरे देश की राजनीति के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और परिवार के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक था। उनके योगदान को भारतीय राजनीति और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी हमेशा याद रखेगी। इस दुखद हादसे ने एक अनुभवी नेता और एक समर्पित परिवारिक सदस्य को हमसे छीन लिया।

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