Middle East Crisis: मध्य-पूर्व की राजनीति में बड़ा भूचाल आने की संभावना के बीच ईरान में सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। ईरान के अंतिम शाह के बेटे Reza Pahlavi ने दावा किया है कि देश के भीतर और विदेशों में रहने वाले ईरानियों ने उन्हें संभावित सत्ता परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए एक संभावित अंतरिम सरकार के गठन के लिए तैयार हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबरों के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक उथल-पुथल की स्थिति बन गई है। इस घटनाक्रम ने न केवल ईरान की राजनीति बल्कि पूरे मध्य-पूर्व की रणनीतिक स्थिति को प्रभावित करने की आशंका पैदा कर दी है।

निर्वासन में रह रहे रज़ा पहलवी ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि उन्हें बड़ी संख्या में ईरानी नागरिकों से कॉल और संदेश मिले हैं। इन संदेशों में उनसे संभावित “पोस्ट-रिजीम ट्रांजिशन” यानी मौजूदा शासन के बाद के दौर का नेतृत्व करने की अपील की गई। पहलवी ने कहा कि ईरान की जनता चाहती है कि देश को फिर से अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सामान्य संबंधों की दिशा में आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सत्ता पर कब्जा करना नहीं बल्कि एक स्थिर और लोकतांत्रिक संक्रमण सुनिश्चित करना है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि उनकी प्राथमिकता देश में स्थिरता बनाए रखना और जनता को अपने भविष्य का फैसला लोकतांत्रिक तरीके से करने का अवसर देना है।
रज़ा पहलवी ने अपने बयान में अरब देशों से भी अपील की है कि वे संभावित अंतरिम सरकार को मान्यता देने के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि यदि ईरान में शासन परिवर्तन होता है तो क्षेत्रीय सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि अरब दुनिया के साथ बेहतर संबंध स्थापित करना नई सरकार की प्राथमिकता होगी। पहलवी के अनुसार उनका लक्ष्य ईरान को फिर से एक जिम्मेदार क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान मध्य-पूर्व की कूटनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है, क्योंकि ईरान और कई अरब देशों के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए सैन्य हमलों के बाद हुई। इन हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। ईरान और Israel के बीच संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। वहीं United States भी इस टकराव में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इस स्थिति ने पूरे मध्य-पूर्व को एक बड़े सैन्य और राजनीतिक संकट की ओर धकेल दिया है।

रज़ा पहलवी ईरान के अंतिम शाह Mohammad Reza Pahlavi के सबसे बड़े बेटे हैं। 1979 की Iranian Revolution के बाद ईरान में इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना हुई और शाही परिवार को देश छोड़ना पड़ा। 1960 में जन्मे पहलवी तब से विदेश में रह रहे हैं और ईरानी विपक्ष के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। वह लंबे समय से ईरान में धर्मनिरपेक्ष शासन, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक सुधारों की वकालत करते रहे हैं। उनका कहना है कि ईरान को धार्मिक शासन से बाहर निकालकर एक आधुनिक और लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाना जरूरी है। पिछले कुछ वर्षों में ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान रज़ा पहलवी का नाम बार-बार सामने आया। उन्होंने कई वीडियो संदेश जारी कर ईरानी नागरिकों से सड़कों पर उतरने और मौजूदा शासन का विरोध करने की अपील की थी। उनके समर्थकों का मानना है कि वह ईरान में राजनीतिक बदलाव का प्रतीक बन चुके हैं। हालांकि आलोचक कहते हैं कि देश के अंदर उनकी वास्तविक राजनीतिक ताकत का अभी स्पष्ट अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रज़ा पहलवी को अमेरिका के कुछ राजनीतिक हलकों का समर्थन मिल सकता है। खासकर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के साथ उनकी नजदीकियों की चर्चा अक्सर होती रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अमेरिका ने कभी यह घोषणा नहीं की कि वह पहलवी को ईरान का अगला नेता बनाने का समर्थन करता है।

इसी बीच खबर है कि Donald Trump ने निजी स्तर पर ईरान में सीमित संख्या में अमेरिकी सैनिक भेजने के विकल्प पर भी विचार किया है। रिपोर्टों के अनुसार यह योजना बड़े पैमाने पर युद्ध नहीं बल्कि विशेष रणनीतिक मिशनों के लिए सैनिक तैनाती से जुड़ी हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि युद्ध के बाद के ईरान को लेकर भी एक संभावित योजना तैयार की जा रही है। इसमें ईरान के यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना और नई सरकार के साथ तेल उत्पादन में सहयोग जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। हालांकि व्हाइट हाउस ने इन रिपोर्टों को अटकल बताते हुए कहा है कि अभी किसी अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की गई है।
अमेरिकी सैन्य कमान के अनुसार हाल के सैन्य अभियानों के दौरान ईरान के अंदर हजारों लक्ष्यों पर हमले किए गए हैं और कई सैन्य जहाजों को नुकसान पहुंचाया गया है। दूसरी ओर ईरान भी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और इजरायल को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। इससे पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका बढ़ गई है। ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने कहा है कि उनका देश युद्धविराम की मांग नहीं कर रहा और फिलहाल अमेरिका के साथ बातचीत का कोई कारण नहीं देखता।
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