Karnataka Hate Speech Bill : कर्नाटक विधानसभा (Karnataka Assembly) के शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस (Congress) सरकार ने एक अहम और विवादास्पद विधेयक को सदन से पारित करा लिया है। बुधवार, 17 दिसंबर 2025 को बेलगावी में विपक्षी दलों, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) (Janata Dal (Secular)), के तीखे विरोध के बावजूद ’’कर्नाटक हेट स्पीच विधेयक’’ (Karnataka Hate Speech Bill ) को मंजूरी दे दी गई। विधेयक के पारित होते ही सदन के भीतर जोरदार हंगामा देखने को मिला। सरकार का कहना है कि यह कानून समाज में बढ़ती नफरत, वैमनस्य और भेदभाव की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए लाया गया है, जबकि विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहा है।
इस नए कानून में हेट स्पीच को किसी व्यक्ति या समुदाय के विरुद्ध जानबूझकर चोट पहुंचाने, सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने या नफरत फैलाने के उद्देश्य से दिए गए बयान के रूप में परिभाषित किया गया है। विधेयक में कुल ’'11 आधारों’' पर भेदभाव, नफरत फैलाने वाले वक्तव्यों और अपराधों को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है, ताकि कमजोर और हाशिए पर खड़े वर्गों को कानूनी सुरक्षा मिल सके। कानून के तहत हेट क्राइम को केवल भाषण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे संचार के हर माध्यम से जोड़ा गया है। इसमें किसी भी तरह की सामग्री का निर्माण, प्रकाशन, प्रसारण, प्रचार या उकसावे की कार्रवाई शामिल होगी, जिससे समाज में घृणा या असामंजस्य फैलने की आशंका हो।
विधेयक में “कम्युनिकेशन” की परिभाषा को व्यापक रखा गया है। इसके तहत मौखिक बयान, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या किसी अन्य सार्वजनिक अभिव्यक्ति को कानून के अंतर्गत लाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे ऑनलाइन नफरत फैलाने वाली गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
प्रस्तावित कानून के अनुसार, पहली बार दोषी पाए जाने पर ’’न्यूनतम एक वर्ष से लेकर अधिकतम सात वर्ष तक की जेल’’ और ’’50 हजार रुपये तक के जुर्माने’’ का प्रावधान है। वहीं, दोबारा अपराध करने पर सजा और भी कठोर होगी, दोषी को ’’कम से कम दो वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की कैद’’ तथा ’’एक लाख रुपये तक का जुर्माना’’ लगाया जा सकेगा। यह अपराध ’’संज्ञेय और गैर-जमानती’’ होंगे और इनकी सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में की जाएगी।
कानून में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निवारक कार्रवाई के प्रावधान भी जोड़े गए हैं। इसके तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट या डीएसपी रैंक से ऊपर के पुलिस अधिकारी आवश्यक कदम उठा सकेंगे। इसके अलावा, यदि किसी संगठन या संस्था की ओर से अपराध किया जाता है, तो उस समय जिम्मेदारी संभाल रहे व्यक्तियों को आरोपी माना जाएगा। विधेयक के तहत एक नामित अधिकारी को यह अधिकार दिया गया है कि वह इंटरनेट सेवा प्रदाताओं या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को हेट स्पीच या हेट क्राइम से जुड़ी सामग्री हटाने या ब्लॉक करने का निर्देश दे सके। साथ ही, अदालतें अपराध की गंभीरता और उसके प्रभाव को देखते हुए पीड़ितों को उचित मुआवजा देने का आदेश भी दे सकेंगी।
बीजेपी ने इस कानून का जोरदार विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि इसका उद्देश्य एक खास वर्ग की आवाज दबाना है। पार्टी का कहना है कि यह विधेयक भविष्य में राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने का हथियार बन सकता है। वहीं, कांग्रेस सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कानून का मकसद केवल सामाजिक सौहार्द और संविधानिक मूल्यों की रक्षा करना है।
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