राघव चड्ढा का भगवंत मान पर बड़ा हमला, वायरल वीडियो मामले में इस्तीफे की मांग
खबर सार :-
राघव चड्ढा ने कहा कि सिख समुदाय की ओर से मुख्य रूप से दो मांगें सामने आ रही हैं। पहली मांग यह है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें। दूसरी मांग यह है कि नए बेअदबी कानून के तहत उनके खिलाफ पहली प्राथमिकी दर्ज की जाए।
खबर विस्तार : -
चंडीगढ़ः राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर सामने आए कथित वीडियो विवाद पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मामले की सच्चाई छिपाने के लिए फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाई है। उन्होंने कहा कि यदि यह आरोप सही हैं तो भगवंत मान के पास मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बचता और उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।
भावनाएं आहत करने का आरोप
राघव चड्ढा ने कहा कि जिस वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसे लेकर पहले लोगों के मन में संदेह था कि वह असली है या फर्जी। लेकिन अब, उनके अनुसार, आम आदमी पार्टी द्वारा कथित रूप से फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाने के आरोपों ने इस संदेह को और गहरा कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि यदि वीडियो वास्तव में फर्जी होता, तो उसे गलत साबित करने के लिए किसी कथित फर्जी रिपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती।
सांसद ने कहा कि यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे धार्मिक भावनाओं और सिख समुदाय की आस्था भी जुड़ी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने इस पूरे प्रकरण में अकाल तख्त के खिलाफ बयानबाजी की और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अभद्र टिप्पणियां करवाई गईं। चड्ढा ने कहा कि सिख संगत इस पूरे घटनाक्रम से बेहद नाराज है और पार्टी के सिख नेताओं से जवाब मांग रही है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के सिख नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे गुरु साहिब के प्रति अपनी निष्ठा रखते हैं, सिख पंथ के साथ खड़े हैं और श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा को मानते हैं या फिर वे भगवंत मान के पक्ष में खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अब पार्टी नेताओं को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।
निष्पक्ष जांच की मांग
राघव चड्ढा ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग भी की। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि कथित फर्जी वीडियो और फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने में किन-किन लोगों की भूमिका रही। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि इस प्रक्रिया में सरकारी या निजी धन का उपयोग हुआ या नहीं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो मनी लॉन्ड्रिंग या रिश्वतखोरी जैसे पहलुओं की भी जांच होनी चाहिए।
सांसद ने कहा कि यह मामला अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं रह गया है, बल्कि इसकी जांच कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर गलत तरीके अपनाए गए हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान या आम आदमी पार्टी की ओर से राघव चड्ढा के इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मामला पंजाब की राजनीति में आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
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