केजरीवाल के अयोध्या दौरे पर बवाल, फूंका गया पुतला, लगाए 'वापस जाओ' के नारे

खबर सार :-

अरविंद केजरीवाल के अयोध्या दौरे को लेकर जहां उनके समर्थक इसे धार्मिक यात्रा बता रहे हैं, वहीं विरोध करने वाले संत और संगठन इसे राजनीतिक कदम करार दे रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद अयोध्या में राजनीतिक और धार्मिक चर्चाओं का माहौल गर्म हो गया है।
केजरीवाल के अयोध्या दौरे पर बवाल, फूंका गया पुतला, लगाए 'वापस जाओ' के नारे

खबर विस्तार : -

अयोध्या: आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के अयोध्या आगमन को लेकर शुक्रवार को कुछ साधु-संतों और सनातन संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केजरीवाल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, उनका पुतला फूंका और आरोप लगाया कि उनका अयोध्या दौरा केवल राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है। विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए।

लगाया राजनीति करने का आरोप

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे साधु किशोर चेतन दास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अरविंद केजरीवाल का अयोध्या आगमन धार्मिक आस्था के बजाय राजनीतिक लाभ हासिल करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और उनके नाम का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से निर्धारित नियमों का पालन करते हुए केजरीवाल का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया गया और उनके दौरे के प्रति विरोध दर्ज कराया गया।

किशोर चेतन दास ने कहा कि विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य यह संदेश देना है कि भगवान राम सभी के हैं और उन्हें किसी भी राजनीतिक एजेंडे का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल की ओर से अतीत में भगवान राम और अयोध्या को लेकर दिए गए बयानों के कारण संत समाज में नाराजगी है।

हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी

वहीं तीर्थ पुरोहित राजेश महाराज ने भी केजरीवाल के अयोध्या आगमन पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने पहले ऐसे बयान दिए थे जिनमें कथित तौर पर अयोध्या में राम मंदिर की जगह अस्पताल बनाए जाने की बात कही गई थी। राजेश महाराज ने कहा कि यदि केजरीवाल स्वयं यह कहते रहे हैं कि भगवान राम मंदिर में नहीं बल्कि लोगों के हृदय में निवास करते हैं, तो अब मंदिर दर्शन के लिए उनका अयोध्या आना सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे राजनीतिक अवसरवाद बताते हुए कहा कि संत समाज ऐसे प्रयासों का विरोध करेगा।

राजेश महाराज ने यह भी दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई की, जिससे संत समाज में असंतोष है।

पुराने बयानों को लेकर उठाए सवाल

सनातन संरक्षक दल के महासचिव मुकुल माधव त्रिपाठी ने भी केजरीवाल के दौरे का विरोध करते हुए कहा कि संगठन ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि उनके अयोध्या आगमन पर काला झंडा दिखाया जाएगा। हालांकि, प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ऐसा नहीं होने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल की भगवान राम और राम मंदिर के प्रति वास्तविक आस्था नहीं है और उनका यह दौरा केवल राजनीतिक महत्वाकांक्षा से प्रेरित है।

त्रिपाठी ने कहा कि अतीत में दिए गए बयानों के कारण संत समाज के बीच केजरीवाल को लेकर विश्वास की कमी है। उन्होंने कहा कि सनातन विरोधी सोच रखने वाले लोगों को धार्मिक स्थलों का राजनीतिक उपयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने प्रशासन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन को सीमित करने का प्रयास किया गया।

उधर, प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। फिलहाल पूरे मामले को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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