World Diabetes Day Special: हर साल 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस (World Diabetes Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों में मधुमेह (Diabetes) के प्रति जागरूकता फैलाना और इसके खतरे को समझाना है। मधुमेह अब सिर्फ उम्रदराज़ लोगों की बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह तेजी से युवाओं और बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है। तनाव, गलत खानपान और निष्क्रिय जीवनशैली इसके मुख्य कारण बनकर उभर रहे हैं।
मधुमेह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर इंसुलिन नामक हार्मोन का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाता या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन पर सही तरह प्रतिक्रिया नहीं देतीं। इंसुलिन का काम भोजन से बने ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाना होता है ताकि यह ऊर्जा के रूप में काम आ सके। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है, जिसे ब्लड शुगर लेवल कहा जाता है। यही स्थिति मधुमेह कहलाती है।
डायबिटीज मुख्यतः तीन प्रकार की होती है:
टाइप 1 डायबिटीज: इसमें शरीर का पैंक्रियाज इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। यह स्थिति अक्सर बच्चों या युवाओं में देखी जाती है और यह आजीवन दवा पर निर्भर होती है।
टाइप 2 डायबिटीज: इसमें शरीर इंसुलिन का पर्याप्त उपयोग नहीं कर पाता। यह ज्यादातर खराब खानपान, मोटापा और तनाव के कारण होती है।
गर्भावधि मधुमेह (Gestational Diabetes): यह गर्भावस्था के दौरान होती है और सही खानपान व देखभाल से नियंत्रित की जा सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (IDF) के मुताबिक, दुनिया में हर 9 में से 1 वयस्क डायबिटीज से प्रभावित है। आंकड़े बताते हैं कि करीब 40 प्रतिशत युवाओं को यह पता तक नहीं कि वे डायबिटीज या प्री-डायबिटीज के शिकार हैं। तनाव, फास्ट फूड, नींद की कमी और मोबाइल पर अधिक समय बिताने जैसी आधुनिक आदतें युवाओं में डायबिटीज का खतरा बढ़ा रही हैं। भारत में हर साल लाखों नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
डायबिटीज से बचाव के लिए जीवनशैली में सुधार सबसे अहम है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, नींद और तनाव पर नियंत्रण से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। चीनी, प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड से दूरी बनाकर और फाइबरयुक्त आहार जैसे साबुत अनाज, हरी सब्जियां और फल खाने से ब्लड शुगर को नियंत्रित रखा जा सकता है।
भारत सरकार और कई गैर-सरकारी संगठन ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों तक मधुमेह जांच और जागरूकता अभियान चला रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों में युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती जांच और सही जीवनशैली अपनाई जाए, तो डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है।
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