Rahul Gandhi Letter To Lok Sabha Speaker : सदन की निष्पक्षता पर सवाल, राहुल गांधी ने अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर दिलाई संवैधानिक कर्तव्यों की याद

खबर सार :-
Rahul Gandhi Letter To Lok Sabha Speaker : विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर सदन की निष्पक्षता बनाए रखने की अपील की है। जानें लद्दाख गतिरोध और जनरल नरवणे की पुस्तक को लेकर संसद में क्यों मचा घमासान।

Rahul Gandhi Letter To Lok Sabha Speaker : सदन की निष्पक्षता पर सवाल, राहुल गांधी ने अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर दिलाई संवैधानिक कर्तव्यों की याद
खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: भारतीय संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच का गतिरोध अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार को लोकसभा में हुए भारी हंगामे के बाद, विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी ने अध्यक्ष ओम बिरला को एक कड़ा पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने न केवल अपनी बात रखने में आई बाधाओं पर आपत्ति जताई, बल्कि अध्यक्ष को 'सदन का निष्पक्ष संरक्षक' होने की उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी भी याद दिलाई।

Rahul Gandhi Letter To Lok Sabha Speaker : लोकतंत्र पर कलंक, राहुल गांधी का गंभीर आरोप

राहुल गांधी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि संसदीय इतिहास में शायद यह पहली बार है जब सरकार के दबाव में विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोका गया है। उन्होंने इस घटनाक्रम को 'लोकतंत्र पर एक कलंक' करार दिया। गांधी का तर्क है कि सदन के भीतर हर सदस्य, विशेषकर विपक्ष के नेता के बोलने के अधिकार की रक्षा करना अध्यक्ष का प्राथमिक कर्तव्य है। सदन में हंगामे की मुख्य वजह 2020 का भारत-चीन सैन्य गतिरोध रहा। राहुल गांधी ने लद्दाख मुद्दे को उठाने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि चूंकि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी, इसलिए इस पर चर्चा करना अनिवार्य था। विवाद तब और गहरा गया जब राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक के कुछ अंशों को सदन में पढ़ने का प्रयास किया। अध्यक्ष ने उन्हें दस्तावेज प्रमाणित करने का निर्देश दिया था, जिसका पालन करने के बावजूद उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई।

Rahul Gandhi Letter To Lok Sabha Speaker : संसदीय परंपराओं का हवाला

अपने पत्र में राहुल गांधी ने सदन की पुरानी परंपराओं का उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई सदस्य किसी दस्तावेज का संदर्भ देना चाहता है, तो उसे उसे प्रमाणित करना होता है। सामग्री की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बाद अध्यक्ष को अनुमति देनी चाहिए। एक बार अनुमति मिलने के बाद, जिम्मेदारी सरकार की होती है कि वह उन तथ्यों का जवाब दे। गांधी ने कहा, "आज मुझे बोलने से रोकना न केवल परंपरा का उल्लंघन है, बल्कि यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विपक्ष की आवाज को दबाने का संगठित प्रयास किया जा रहा है।" संसद का माहौल उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गया जब विपक्षी सांसदों ने सरकार के रुख के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। आसन की ओर कागज फेंकने और कार्यवाही में बाधा डालने के आरोप में आधे दर्जन से अधिक विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया। विपक्ष का कहना है कि वे केवल देश की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब चाहते हैं। राहुल गांधी का यह पत्र केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि संसदीय गरिमा को बनाए रखने की एक अपील भी है। उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र तभी जीवित रहता है जब असहमतियों को सुना जाए और महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्वस्थ बहस हो। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में अध्यक्ष और सत्ता पक्ष इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
 

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