Modi government trade deal, Rahul Priyanka allegations : भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापार समझौते को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने इस ट्रेड डील को भारतीय किसानों और घरेलू कृषि व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस समझौते को “किसानों की मेहनत के साथ समझौता” करार दिया है और सरकार से पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग की है।
कांग्रेस महासचिव और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि इस ट्रेड डील से अमेरिकी किसानों को भारतीय बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी और इससे ग्रामीण अमेरिका को आर्थिक लाभ होगा। प्रियंका गांधी ने पूछा कि जब अमेरिकी किसान लाभ में हैं, तो भारतीय किसानों के हिस्से में क्या आया? क्या सरकार भारतीय कृषि क्षेत्र को पूरी तरह अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने की तैयारी में है? क्या देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों को बहुराष्ट्रीय कृषि कंपनियों से सीधे प्रतिस्पर्धा में धकेला जा रहा है? उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को तुरंत यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस समझौते की शर्तें क्या हैं और किसानों के हितों की सुरक्षा कैसे की गई है।
प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें राहुल गांधी प्रधानमंत्री की नेतृत्व शैली पर सवाल उठाते नजर आते हैं। राहुल गांधी का कहना है कि देश का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति का काम दिशा देना होता है, न कि जिम्मेदारियों से बचना। उनका आरोप है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील जैसे अहम फैसले में प्रधानमंत्री ने निर्णय लेने की जिम्मेदारी दूसरों पर डाल दी, जो देशहित के लिए ठीक नहीं है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि सरकार इस ट्रेड डील को लेकर दबाव में है। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता लंबे समय से रुका हुआ था, लेकिन बिना किसी बड़े बदलाव के अचानक इसे मंजूरी दे दी गई। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोका गया, जो संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में अभूतपूर्व है। उनके मुताबिक, सरकार इस मुद्दे पर खुली चर्चा से बचना चाहती है।
राहुल गांधी ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि इस ट्रेड डील में किसानों की मेहनत और खून-पसीने को दांव पर लगा दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल किसानों ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और घरेलू उद्योगों के साथ भी समझौता है। उनका मानना है कि सरकार की बनाई हुई मजबूत छवि अब दबाव में है और इसी डर के चलते सवाल उठाने वालों को चुप कराने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी इस ट्रेड डील पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जिस तरह से इस समझौते की घोषणा अमेरिका की ओर से की गई, उससे भारत की सौदेबाजी की स्थिति पर संदेह होता है। कांग्रेस का साफ कहना है कि सरकार को संसद में इस ट्रेड डील की पूरी जानकारी देनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि किसानों, व्यापारियों और घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा कैसे की गई है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुकी है। कांग्रेस का आरोप है कि यह समझौता भारतीय किसानों के भविष्य को खतरे में डाल सकता है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक स्पष्ट और विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक गूंज सकता है।
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