Union Budget 2026: भारत के संसदीय इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश के लोकतांत्रिक और संसदीय इतिहास का “गौरवपूर्ण क्षण” करार दिया है। यह न सिर्फ किसी महिला वित्त मंत्री की अभूतपूर्व उपलब्धि है, बल्कि 21वीं सदी के दूसरे चरण में भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला बजट भी माना जा रहा है।
संसद के बजट सत्र से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का पहला एक-चौथाई हिस्सा पूरा हो चुका है और अब दूसरा चरण शुरू हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आने वाले 25 साल निर्णायक होंगे। ऐसे समय में पेश होने वाला यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत के भविष्य का रोडमैप होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने खास तौर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की उपलब्धि का जिक्र करते हुए कहा कि वह देश की पहली महिला हैं जो लगातार नौवीं बार संसद में बजट पेश करेंगी। यह उपलब्धि भारत के संसदीय इतिहास में हमेशा दर्ज रहेगी। उन्होंने इसे नारी नेतृत्व, राजनीतिक स्थिरता और निरंतर नीतिगत दृष्टि का प्रतीक बताया।
यह बजट मोदी सरकार का कुल 15वां बजट होगा। 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए की लगातार तीसरी जीत के बाद यह दूसरा पूर्ण बजट है। ऐसे में इससे न केवल आर्थिक सुधारों की निरंतरता की उम्मीद की जा रही है, बल्कि रोजगार, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर भी खास फोकस रहने की संभावना है।
पीएम मोदी ने कहा कि बजट सत्र ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को नई गति देगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” के सिद्धांत पर आगे बढ़ रही है। उनके शब्दों में, सरकार अब अल्पकालिक समाधानों से आगे निकलकर दीर्घकालिक और स्थायी नीतियों पर काम कर रही है, जिससे आर्थिक स्थिरता और वैश्विक भरोसा दोनों मजबूत हो।

बजट से पहले संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2026 (Economic Survey 2026) पेश किया जाएगा, जो देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति, वैश्विक चुनौतियों और अवसरों का विश्लेषण करेगा। यही सर्वे बजट प्रस्तावों की बुनियाद बनेगा। इसमें कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र, रोजगार, महंगाई और राजकोषीय घाटे जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत दृष्टिकोण होगा।
केंद्रीय बजट 2026-27 को तैयार करने में अनुभवी नौकरशाहों और अर्थशास्त्रियों की एक मजबूत टीम जुटी हुई है।
अनुराधा ठाकुर (आर्थिक मामलों की सचिव): बजट की पूरी रूपरेखा तैयार करने में उनकी भूमिका अहम है। वह बजट डिवीजन का नेतृत्व करती हैं और संसाधनों के आवंटन, खर्च की सीमा और विकास व स्थिरता के संतुलन को सुनिश्चित करती हैं।
वी. अनंत नागेश्वरन (मुख्य आर्थिक सलाहकार): वैश्विक आर्थिक जोखिमों का आकलन, विकास दर का अनुमान और दीर्घकालिक आर्थिक सुधारों पर सलाह देना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है।
अरविंद श्रीवास्तव (राजस्व सचिव): आयकर, कॉरपोरेट टैक्स, जीएसटी और सीमा शुल्क जैसे कर ढांचे की देखरेख करते हैं। यह उनके लिए राजस्व सचिव के रूप में पहला बजट होगा।
वुमलुनमंग वुअलनाम (व्यय सचिव): सरकारी खर्च, सब्सिडी सुधार और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में उनकी भूमिका निर्णायक है।
एम. नागराजू (वित्तीय सेवा विभाग सचिव): बैंकिंग, बीमा, पेंशन और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालते हैं।
अरुणिश चावला (निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन सचिव): विनिवेश और सरकारी संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के जरिए गैर-कर राजस्व बढ़ाने का दायित्व निभाते हैं।
पीएम मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ (India-EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हो रही प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता एक आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर पेश करता है। इससे भारतीय निर्माताओं को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी और गुणवत्ता आधारित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार है और लंबित मुद्दों के दीर्घकालिक समाधान की ओर तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने सांसदों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सुधारों की यह रफ्तार आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत नींव रखेगी।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि सरकार तकनीक को अपनाएगी, लेकिन इंसान-केंद्रित दृष्टिकोण से समझौता नहीं करेगी। संवैधानिक मूल्यों के साथ तकनीक के संतुलित उपयोग पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हर फैसला लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत का लोकतंत्र, उसकी जनसंख्या और उसकी निर्णय प्रक्रिया दुनिया के लिए उम्मीद की किरण हैं। संसद को उन्होंने “लोकतंत्र का मंदिर” बताते हुए कहा कि यहीं से भारत वैश्विक समुदाय को अपनी विश्वसनीयता और प्रतिबद्धता का संदेश देता है।
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