म्यूल अकाउंट पर केंद्र सरकार का बड़ा कदम, मजबूत होगी साइबर सुरक्षा

खबर सार :-
केंद्र सरकार ने साइबर अपराध पर लगाम लगाने के प्रयास में 'म्यूल अकाउंट्स' की पहचान करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा की गई एक पोस्ट में, गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार एक साइबर-सुरक्षित भारत बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

म्यूल अकाउंट पर केंद्र सरकार का बड़ा कदम, मजबूत होगी साइबर सुरक्षा
खबर विस्तार : -

नई दिल्लीः भारत में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले “म्यूल अकाउंट्स” की पहचान और रोकथाम के लिए एक नई तकनीकी व्यवस्था लागू की जा रही है। इस दिशा में गृह मंत्री अमित शाह ने जानकारी दी कि सरकार साइबर सुरक्षित भारत बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

समय रहते लिया जा सकेगा एक्शन

उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने रिजर्व बैंक इनोवेशन हब के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस समझौते का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से साइबर धोखाधड़ी के नेटवर्क को पहचानना और उसे खत्म करना है।

अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए बताया कि म्यूल अकाउंट्स साइबर अपराधों में एक बड़ी बाधा हैं, जिनका उपयोग ठगी और अवैध लेनदेन के लिए किया जाता है। अब नई तकनीक के जरिए संदिग्ध बैंक खातों की पहचान तेजी से की जाएगी और उन्हें समय रहते बंद किया जा सकेगा।

इस पहल के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र द्वारा तैयार की गई संदिग्ध खातों की सूची को एआई आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम में शामिल किया जाएगा। इससे ऐसे छिपे हुए म्यूल अकाउंट्स का पता लगाना आसान होगा जो अब तक निगरानी से बचते रहे हैं। सरकार का मानना है कि यह कदम साइबर अपराधों के खिलाफ एक मजबूत “अगली पीढ़ी की सुरक्षा ढाल” साबित होगा।

चलाया जाएगा प्रशिक्षण अभियान

देश में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। डिजिटल इंडिया के विस्तार के साथ-साथ साइबर ठगी, फिशिंग, रैनसमवेयर, डाटा चोरी और साइबर जासूसी जैसे मामलों में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन हमलों से वित्तीय प्रणाली, सरकारी पोर्टल और आम नागरिकों की निजी जानकारी तक खतरे में पड़ रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, भारत में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की कमी भी एक बड़ी चुनौती है। इसी कारण सुझाव दिया गया है कि विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को अपने पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा को अनिवार्य रूप से शामिल करना चाहिए। साथ ही, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के साथ वित्तीय धोखाधड़ी के मामले भी बढ़े हैं। कई बार सरकारी वेबसाइटों, स्वास्थ्य डाटाबेस और यहां तक कि बिजली जैसी आवश्यक सेवाओं की प्रणालियों पर भी साइबर हमलों की कोशिशें की गई हैं।

सरकार की यह नई पहल न केवल साइबर अपराधों पर नियंत्रण लगाने में मदद करेगी, बल्कि डिजिटल लेनदेन को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
 

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