Dhar Bhojshala: मध्य प्रदेश के धार ज़िले में ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर हिंदुओं और मुस्लिम समुदाय के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court ) ने विवाद पर एक ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार बसंत पंचमी पर शुक्रवार को भोजशाला में पूजा और नमाज दोनों की इजाजत होगी। हालांकि, कोर्ट ने इसके लिए समय सीमा तय की है। इस मौके पर धार जिले में आठ हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी और अधिकारी तैनात किए जाएंगे।
दरअसल यह विवाद तब होता है जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती है। एक तरफ, हिंदू समुदाय पूरे दिन पूजा करना चाहता है, जैसा कि वे हर साल करते हैं, वहीं दूसरी तरफ, मुस्लिम समुदाय तय समय के अनुसार जुमे की नमाज़ पढ़ना चाहता है। इस बार बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है। जिसके चलते एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया। हालांकि पूजा और नमाज दोनों की इजाजत दे दी है। इसके लिए कोर्ट ने अलग-अलग टाइम की मंजूरी दी है। हिदू पक्ष के लोग सुबह से दोपहर 12 बजे तक पूजा कर सकेंगे। इसके बाद मुस्लिम पक्ष नमाज पढ़ेगा। वहीं फिर हिंदू शाम 4 बजे से फिर पूजा कर सकेंगे। ऐसे मौकों पर धार जिला पुलिस और प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
बता दें कि हिंदू भोजशाला को वाग्देवी ( देवी सरस्वती) का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। यह जगह 11वीं सदी का एक स्मारक है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है। 7 अप्रैल, 2003 को ASI द्वारा किए गए एक इंतजाम के अनुसार, हिंदू मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा करते हैं, और मुसलमान शुक्रवार को वहां नमाज पढ़ते हैं। दरअसल हिंदू और मुस्लिम समूहों ने 23 जनवरी, शुक्रवार को भोजशाला कॉम्प्लेक्स में धार्मिक गतिविधियों के लिए इजाजत मांगी थी। उसी दिन बसंत पंचमी के मौके पर सरस्वती पूजा भी की जाएगी।
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की तीन जजों की बेंच ने की। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court ) ने एक साफ़ आदेश जारी किया कि बसंत पंचमी पर धार की भोजशाला में पूजा और नमाज दोनों की इजाज़त होगी। लेकिन टाइमिंग अलग-अलग होगी। सुप्रीम कोर्ट ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि सबसे अच्छा होगा कि प्रशासनिक व्यवस्था की जाए ताकि दोनों समुदाय अपने-अपने धार्मिक कर्तव्य निभा सकें। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखना सर्वोपरि है और प्रशासन को इसी भावना से व्यवस्था करनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मुस्लिम समुदाय के जो लोग नमाज़ के लिए आते हैं, उनकी एक लिस्ट ज़िला प्रशासन को दी जाए।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज़ पढ़ी जा सकती है। इसके लिए मंदिर परिसर के अंदर एक अलग जगह तय की जाएगी। नमाज़ पढ़ने वालों के लिए स्पेशल पास का भी इंतजाम किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम समुदाय अधिकारियों को नमाज में शामिल होने वाले लोगों की संख्या के बारे में बताएगा, और उसी कॉम्प्लेक्स के अंदर मुस्लिम समुदाय के लिए एक खास जगह और अलग एंट्री और एग्जिट पॉइंट दिए आएंगे।
इसी तरह हिंदू समुदाय को भी पूजा के लिए एक अलग जगह और एंट्री और एग्जिट पॉइंट दिया जा सकता है। हिंदू समुदाय को भी बसंत पंचमी की पूजा के लिए भी एक अलग जगह तय की जाएगी। हालांकि पूजा के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखते हुए सभी जरूरी इंतजाम किए जाएं।
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