केंद्रीय बजट 2026 : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस बजट की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'नीरस' और 'पारदर्शिता की कमी' वाला बताया। बजट में प्रमुख घोषणाओं के बावजूद, कांग्रेस ने इसे प्रचार से ज्यादा कुछ नहीं बताया है। रमेश ने कहा कि यह बजट वित्तीय आवंटन और कार्यक्रमों के संदर्भ में बिल्कुल स्पष्ट नहीं है।
जयराम रमेश ने क्या कहा?
जयराम रमेश ने केंद्रीय बजट 2026-27 की आलोचना करते हुए कहा कि यह बजट, जिसे लेकर व्यापक प्रचार किया गया था, उतना प्रभावशाली नहीं है। उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'दस्तावेज़ का अध्ययन अभी बाकी है, लेकिन मात्र 90 मिनट बाद ही यह साफ हो गया कि इस बजट में वह दमखम नहीं है, जैसा पहले प्रचारित किया गया था।'
उन्होंने खास तौर पर बजट के भाषण को नीरस और पारदर्शी न होने का आरोप लगाया। रमेश का मानना है कि केंद्रीय बजट में प्रमुख कार्यक्रमों के लिए वित्तीय आवंटन की जानकारी स्पष्ट नहीं दी गई है, जो पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की प्रमुख घोषणाएँ
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बजट में कई महत्वाकांक्षी घोषणाएं कीं, जिनमें सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव भी शामिल है। इन सात हाई-स्पीड रेल मार्गों का उद्देश्य देश के प्रमुख शहरी और आर्थिक केंद्रों को एक साथ जोड़ना है, जिससे यात्रा का समय कम हो और पर्यावरणीय प्रभाव भी घटे।
इनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी जैसे प्रमुख मार्ग शामिल हैं।इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बजट में समर्पित माल ढुलाई कॉरिडोर और 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों के निर्माण का प्रस्ताव भी दिया गया है। वित्त मंत्री ने इन उपायों को भारत के परिवहन ढांचे को सुदृढ़ करने के रूप में देखा है, जो आर्थिक विकास को गति देगा और विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने में मदद करेगा।
कांग्रेस की नजर में बजट में कहां कमी है?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने विशेष रूप से बजट में पारदर्शिता की कमी को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि बजट में घोषणा की गई योजनाओं के वित्तीय विवरणों में अस्पष्टता है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि बजट भाषण के दौरान कई महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए बजट आवंटन का कोई जिक्र नहीं किया गया, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार बजट को लेकर गंभीर नहीं है। वर्तमान में बजट के प्रस्तावित योजनाओं और घोषणाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि यह बजट सिर्फ प्रचार के लिए तैयार किया गया है, जबकि जमीनी स्तर पर इसके प्रभाव और कार्यान्वयन पर कोई स्पष्टता नहीं है। वित्त मंत्री ने इस बजट में युवशक्ति और "तीन कर्तव्य" के सिद्धांतों पर जोर दिया, लेकिन विपक्षी दलों का मानना है कि यह बजट केवल कागजों तक सीमित है, और इसमें असल बदलाव की कोई योजना नहीं है।
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