नई दिल्ली : सरकार केंद्रीय बजट 2026 में कुल मिलाकर करीब 53.5 लाख करोड़ रुपए खर्च कर सकती है। इस बजट में पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर), यानी सड़क, रेलवे और अन्य बुनियादी ढांचे पर होने वाला खर्च करीब 15 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। सरकार का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
गुरुवार को जारी निवेश प्रबंधन फर्म ओमनीसाइंस कैपिटल की रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 9 प्रतिशत नॉमिनल जीडीपी वृद्धि के आधार पर वित्त वर्ष 2027 में कर राजस्व में साल-दर-साल लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स के अलावा होने वाली आय भी करीब 10 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। इसकी वजह सरकारी कंपनियों से होने वाला लाभ और लाभांश सामान्य स्तर पर रहना है। इस अनुमान में आरबीआई से किसी खास अतिरिक्त राशि को शामिल नहीं किया गया है।
वहीं, सरकार के उधार में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है, जो साल-दर-साल करीब 3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इससे संकेत मिलता है कि वित्त वर्ष 2027 में राजकोषीय घाटा 4.1 से 4.2 प्रतिशत के बीच रह सकता है, जो सरकार की घाटा कम करने की नीति के अनुरूप है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले 10 वर्षों में केंद्रीय बजट का स्वरूप काफी बदला है।
वित्त वर्ष 2016 में कुल बजट का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा पूंजीगत व्यय पर जाता था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 30.6 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है। पूंजीगत व्यय में लगातार बढ़ोतरी यह दिखाती है कि सरकार अब लंबे समय की संपत्तियां बनाने और भविष्य की आर्थिक वृद्धि पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
पिछले दस वर्षों में पूंजीगत व्यय औसतन 15 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ा है, जबकि रोजमर्रा के खर्च यानी राजस्व खर्च की वृद्धि दर करीब 8.8 प्रतिशत रही है। इसका मतलब है कि सरकार सिर्फ खर्च बढ़ाने की बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, कामकाज की क्षमता बढ़ाने और निजी निवेश को आकर्षित करने पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
अनुमानित पूंजीगत व्यय में राज्यों को दी जाने वाली सहायता और पूंजीगत संपत्तियों के लिए अनुदान भी शामिल हैं। वित्त वर्ष 2027 में कुल सार्वजनिक पूंजीगत व्यय करीब 17 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास को मजबूती मिलेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, बजट में रक्षा और मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च सरकार की प्राथमिकता बना रहेगा। हालांकि, धीरे-धीरे तकनीक, ऊर्जा और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान बढ़ाया जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ब्याज भुगतान सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिससे खर्च में ज्यादा लचीलापन रखना आसान नहीं है।
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