Quick Commerce Jobs: भारत का क्विक-कॉमर्स सेक्टर अब सिर्फ तेज डिलीवरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह टेक्नोलॉजी और डेटा-आधारित रणनीतियों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जॉब पोर्टल फाउंडइट की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेक्टर में व्हाइट-कॉलर नौकरियों की पोस्टिंग में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल जॉब पोस्टिंग में अब व्हाइट-कॉलर भूमिकाओं की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र के बदलते स्वरूप की ओर संकेत करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, क्विक-कॉमर्स कंपनियां अब केवल आक्रामक विस्तार की बजाय परिचालन दक्षता और पूर्वानुमान आधारित रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। फाउंडइट की मार्केटिंग उपाध्यक्ष अनुपमा भीमराजका के मुताबिक, “भारत का क्विक-कॉमर्स सेक्टर पैमाने-आधारित विकास से दक्षता और इंटेलिजेंस-आधारित विस्तार की ओर बढ़ रहा है।” कंपनियां अब डेटा एनालिटिक्स, प्रोडक्ट टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन स्ट्रेटेजी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ पेशेवरों की तलाश कर रही हैं। इसका मकसद डिमांड फोरकास्टिंग को सटीक बनाना, इन्वेंट्री मैनेजमेंट को बेहतर करना और ग्राहक अनुभव को मजबूत करना है।

रिपोर्ट बताती है कि डेटा और एनालिटिक्स आधारित भूमिकाएं व्हाइट-कॉलर जॉब्स में सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट बनकर उभरी हैं। इनकी हिस्सेदारी 26 प्रतिशत रही, जबकि इन पदों पर जॉब पोस्टिंग में साल-दर-साल 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बाद प्रोडक्ट और ऑप्स-टेक से जुड़ी भूमिकाओं की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत रही, जिनमें 24 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। वहीं सप्लाई चेन और नेटवर्क प्लानिंग भूमिकाओं की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत रही और इनमें 22 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।
डिमांड फोरकास्टिंग एनालिस्ट, प्रोडक्ट मैनेजर और नेटवर्क प्लानिंग मैनेजर जैसे पद सबसे तेजी से बढ़ती भूमिकाओं में शामिल रहे। ये सभी पद इस बात का संकेत देते हैं कि कंपनियां अब डेटा-आधारित निर्णय लेने और लॉजिस्टिक नेटवर्क को अधिक स्मार्ट बनाने पर फोकस कर रही हैं। हालांकि डिलीवरी और डार्क-स्टोर भूमिकाएं अभी भी कुल हेडकाउंट में प्रमुख हैं, लेकिन रणनीतिक निर्णय लेने और स्केलेबल ऑपरेशंस के लिए व्हाइट-कॉलर भूमिकाएं अब केंद्रीय भूमिका निभा रही हैं।

भौगोलिक दृष्टि से बेंगलुरु क्विक-कॉमर्स सेक्टर के व्हाइट-कॉलर जॉब्स का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र की हर चार में से एक व्हाइट-कॉलर नौकरी बेंगलुरु में स्थित है। वहीं हैदराबाद ने औसत से अधिक वृद्धि दर्ज की है, जो ऑप्स-टेक और स्केलेबल प्लानिंग भूमिकाओं की मांग से प्रेरित है। यह दर्शाता है कि टेक इकोसिस्टम वाले शहर इस सेक्टर के विस्तार में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
जनवरी 2026 में विभिन्न उद्योगों में कुल व्हाइट-कॉलर भर्ती माह-दर-माह 2 प्रतिशत घटी, लेकिन सालाना आधार पर इसमें 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे माहौल में क्विक-कॉमर्स सेक्टर का 21 प्रतिशत की दर से बढ़ना इसे अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक गतिशील और अवसरों से भरपूर बनाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में क्विक-कॉमर्स कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और रियल-टाइम डेटा सिस्टम का अधिक उपयोग करेंगी। इससे न केवल परिचालन लागत कम होगी, बल्कि ग्राहकों को तेज और सटीक सेवा भी मिल सकेगी। यह बदलाव बताता है कि क्विक-कॉमर्स अब केवल ‘10-20 मिनट डिलीवरी’ का खेल नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, डेटा और स्मार्ट प्लानिंग का संगम बन चुका है।
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