यूपीआई पेमेंट ने रचा इतिहास, सक्रिय क्यूआर कोड की संख्या पहुंची 70.9 करोड़

खबर सार :-
यूपीआई ने भारत में डिजिटल भुगतान को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। ट्रांजैक्शन की बढ़ती संख्या, क्यूआर कोड का विस्तार और छोटी रकम के भुगतान में यूपीआई का उपयोग यह साबित करता है कि देश तेजी से कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ रहा है। आने वाले समय में इंटरऑपरेबल क्यूआर कोड इस बदलाव को और गति देंगे।

यूपीआई पेमेंट ने रचा इतिहास, सक्रिय क्यूआर कोड की संख्या पहुंची 70.9 करोड़
खबर विस्तार : -

UPI Payments: भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। रोजमर्रा की खरीदारी से लेकर यात्रा, दवाइयों और छोटे लेन-देन तक यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) आम लोगों की पहली पसंद बन चुका है। जुलाई से सितंबर की अवधि में यूपीआई ट्रांजैक्शंस ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं, जो देश में डिजिटल इकोनॉमी की मजबूती को दर्शाता है।

यूपीआई ट्रांजैक्शन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

जुलाई से सितंबर के बीच यूपीआई के माध्यम से कुल 59.33 अरब ट्रांजैक्शन किए गए। यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 33.5 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में कुल 74.84 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ, जो सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। यह तेजी दिखाती है कि भारत में कैशलेस भुगतान को तेजी से अपनाया जा रहा है।

सक्रिय क्यूआर कोड की संख्या 70.9 करोड़

वर्ल्डलाइन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, देश में अब 70.9 करोड़ सक्रिय यूपीआई क्यूआर कोड हो चुके हैं। जुलाई 2024 के बाद से इसमें 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। क्यूआर कोड अब केवल शहरी दुकानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किराना स्टोर, दवा दुकानें, बस-रेलवे स्टेशन और ग्रामीण क्षेत्रों तक फैल चुके हैं।

दुकानों पर भुगतान में ज्यादा इस्तेमाल

रिपोर्ट के मुताबिक यूपीआई का सबसे ज्यादा उपयोग अब पर्सन टू मर्चेंट (P2M) भुगतान के लिए हो रहा है। दुकानों पर होने वाले यूपीआई ट्रांजैक्शंस में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो बढ़कर 37.46 अरब ट्रांजैक्शन तक पहुंच गई है। वहीं, पर्सन टू पर्सन (P2P) लेन-देन में भी 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो 21.65 अरब ट्रांजैक्शन तक पहुंच चुकी है।

औसत ट्रांजैक्शन राशि में गिरावट

हालांकि ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ी है, लेकिन प्रति ट्रांजैक्शन औसत राशि घटकर 1,262 रुपये रह गई है, जो पहले 1,363 रुपये थी। इसका मतलब यह है कि लोग अब यूपीआई का इस्तेमाल ज्यादा संख्या में छोटी रकम के भुगतान के लिए कर रहे हैं, जैसे खाना, यात्रा, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरतें।

पीओएस मशीनों और कार्ड पेमेंट का हाल

भारत में पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीनों की संख्या भी बढ़कर 12.12 मिलियन हो गई है, जो करीब 35 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं भारत क्यूआर की संख्या में हल्की कमी आई है, क्योंकि व्यापारी अब सीधे यूपीआई क्यूआर कोड को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्रेडिट कार्ड से लेन-देन में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शंस में 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

मोबाइल और टैप पेमेंट का बढ़ता चलन

मोबाइल और टैप आधारित पेमेंट्स भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। खासतौर पर मेट्रो शहरों, टैक्सी सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन में लोग कार्ड स्वाइप करने की बजाय मोबाइल से भुगतान करना पसंद कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह ट्रेंड और मजबूत होने की उम्मीद है।

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