नई दिल्लीः फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सर्विस में स्थिति खराब होने के बावजूद पहली बार स्विगी लिमिटेड को 'सेल' रेटिंग मिली है। स्विगी ने नवंबर 2024 में कंपनी की लिस्टिंग करवाई थी, तब से लेकर पहली बार कंपनी को रेटिंग मिली है। एम्बिट कैपिटल की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, स्विगी ने इन सेक्टर में अपनी शुरुआती बढ़त खो दी है और अब यह कंपनी फूड डिलीवरी सर्विस प्रदान करने में दूसरे और क्विक कॉमर्स सर्विस देने में तीसरे स्थान पर पहुंच गई है।
एम्बिट कैपिटल ने स्विगी की ओर से दी जाने वाली सर्विस कवरेज की शुरुआत सतर्क दृष्टिकोण के साथ की है। कंपनी से जुड़े प्रति शेयर 310 रुपए का टारगेट प्राइस निर्धारित किया गया है। इससे कंपनी के आखिरी कारोबार मूल्य से 20 प्रतिशत से ज्यादा की संभावित गिरावट का संकेत मिलता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फूड डिलीवरी सेगमेंट में स्विगी अब अपने प्रतिस्पर्धी जोमैटो से पिछड़ गई है। जोमैटो की जनता के बीच पहुंच और यूजर्स की संख्या अधिक है, उसके पास आने वाले ऑर्डर की संख्या भी अन्य कंपनियों के मुकाबले ज्यादा होती है। स्विगी की बाजार हिस्सेदारी में गिरावट की गति भी पहले की अपेक्षा धीमी हो गई है, लेकिन एम्बिट को लगता है कि लंबे समय में इसकी हिस्सेदारी घटकर करीब 42 प्रतिशत तक आ जाएगी। स्विगी की क्विक कॉमर्स सर्विस, इंस्टामार्ट भी लगातार कई तरह की मुश्किलों का सामना कर रही है। इस सेगमेंट में कभी सबसे बड़ी कंपनी रही इंस्टामार्ट अब ब्लिंकिट और जेप्टो दोनों से पीछे रह गई है। एम्बिट ने स्विगी के विज्ञापन राजस्व पर बहुत अधिक निर्भर रहने और प्रतिस्पर्धा को कम आंके जाने की भी आलोचना की है।
एम्बिट की रिपोर्ट में स्पष्य रूप से कहा गया है कि इंस्टामार्ट को कई क्षेत्रों में प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकलने के लिए निवेश की जरूरत है। ये क्षेत्र प्रोडक्ट वैरायटी, स्टोर एफिशिएंसी, कस्टमर अधिग्रहण और विज्ञापन पहुंच हैं। हालांकि, जेपी मॉर्गन ने हाल ही में जानकारी दी है कि स्विगी अपने स्टोर की संख्या बढ़ा रहा है और धीरे-धीरे जेप्टो के बराबर पहुंच रहा है, लेकिन एम्बिट अधिक सतर्क है। इंस्टामार्ट की ओर से 10-15 मिनट डिलीवरी के इंडस्ट्री ट्रेंड को लेकर देरी से प्रतिक्रिया भी इसकी गिरावट का एक प्रमुख कारण है। जबकि प्रतिस्पर्धी ब्लिंकिट और जेप्टो ने शुरुआत में फास्ट डिलीवरी स्पीड पर ध्यान केंद्रित किया। स्विगी ने शुरुआत में 30 मिनट की डिलीवरी मॉडल पर काम किया। इसके अलावा, इसे छोटे प्रोडक्ट रेंज और धीमे मार्केटिंग प्रयासों से भी जूझना पड़ा। स्विगी को अब सभी मोर्चों पर कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
अन्य प्रमुख खबरें
पेट्रोल, डीजल के साथ सीएनजी के दाम में भी इजाफा, पिछले 10 दिनों में 5 रुपये बढ़ा
भारत के UPI को साइप्रस में मिली एंट्री, एनपीसीआई और यूरोबैंक के बीच हुआ समझौता
SBI कर्मचारियों द्वारा हड़ताल, 5 दिन प्रभावित रहेंगे बैंक के काम
वैश्विक तनाव के बीच सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव, सीमित दायरे में हो रहा कारोबार
सिद्धार्थनगर में डीजल के लिए हाहाकार भीषण गर्मी में डेढ़ किलोमीटर लंबी कतार
डीआरआई का तस्करों पर डिजिटल स्ट्राइक: 120 करोड़ की 3 लाख ई-सिगरेट जब्त, कई राज्यों में छापेमारी
विदेशी मुद्रा भंडार से बढ़ी RBI की ताकत, सरकार को मिल सकते हैं रिकॉर्ड 3.5 लाख करोड़ रुपए
भारत की चाय ने दुनिया में बजाया डंका, 12 वर्षों में निर्यात 93% बढ़ा, महिलाएं बन रहीं सशक्त
वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में शानदार शुरुआत, सेंसेक्स 75,500 के पार, निवेशकों का बढ़ा भरोसा