सेमीकंडक्टर क्षेत्र का ‘बॉस’ बनेगा भारत, जारी हुआ 10 साल का रोडमैप

खबर सार :-
भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने के लिए एक रोडमैप जारी किया है। यह रोडमैप प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो भारत न केवल वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत करेगा, बल्कि तकनीकी नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी एक नई पहचान स्थापित कर सकता है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र का ‘बॉस’ बनेगा भारत, जारी हुआ 10 साल का रोडमैप
खबर विस्तार : -

नई दिल्लीः भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने के लिए नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने एक व्यापक 10 वर्षीय रोडमैप जारी किया है। “The Future of India’s Semiconductor Industry” नामक इस योजना का उद्देश्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में एक मजबूत और निर्णायक स्थिति दिलाना है।

इस रोडमैप को शुक्रवार को केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण और रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लॉन्च किया। इस अवसर पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी भी मौजूद रहे।

नीति आयोग ने बताया महत्वपूर्ण निर्णय

नीति आयोग ने इस पहल को भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। आयोग के अनुसार, फ्रंटियर टेक्नोलॉजी में नेतृत्व अचानक हासिल नहीं होता, बल्कि इसके लिए दीर्घकालिक योजना, निरंतर क्षमता निर्माण और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समय पर निवेश आवश्यक होता है। इसी सोच के आधार पर यह रोडमैप तैयार किया गया है।

इस रोडमैप में वर्ष 2035 तक भारत में 120 से 150 अरब डॉलर का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इसमें डिजाइन, एडवांस पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर्स और अन्य उभरती तकनीकों को विशेष रूप से प्राथमिकता दी गई है। नीति आयोग का मानना है कि ये क्षेत्र भारत के लिए वैश्विक वैल्यू चेन में बड़ी छलांग लगाने का अवसर प्रदान कर सकते हैं।

नीति आयोग ने कहा कि भारत अब केवल सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के शुरुआती चरण में नहीं है, बल्कि अब वह इसे और गहरा, व्यापक और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके लिए नीति, निवेश और अनुसंधान तीनों स्तरों पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने का प्रयास

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने इस अवसर पर कहा कि भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपेक्षा से अधिक तेजी से प्रगति की है। हालांकि, विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तकनीकी आत्मनिर्भरता अत्यंत आवश्यक होगी। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा रणनीतिक जोखिम ‘ब्लैक-बॉक्स टेक्नोलॉजी’ पर बढ़ती आयात निर्भरता है, जिसे कम करना जरूरी है।

लाहिड़ी ने कहा कि सेमीकंडक्टर केवल एक उद्योग नहीं है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, विनिर्माण, मोबिलिटी, ऊर्जा, संचार और डिजिटल सेवाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों की आधारभूत संरचना है। ऐसे में तकनीकी संप्रभुता की शुरुआत इसी क्षेत्र से होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के लिए पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में एक साथ प्रतिस्पर्धा करना व्यावहारिक नहीं होगा। इसलिए देश को उन क्षेत्रों पर फोकस करना चाहिए जहां उसकी क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बन सकती है। इनमें डिजाइन, एडवांस पैकेजिंग और कंपाउंड सेमीकंडक्टर्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर सकता है भारत

रोडमैप में यह भी स्वीकार किया गया है कि भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए रणनीतिक फोकस के साथ काम करना होगा। इसके लिए स्पष्ट प्राथमिकताओं, मजबूत नीतिगत समर्थन और निजी निवेश को बढ़ावा देने की आवश्यकता होगी।

लाहिड़ी ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन, शुरुआती निवेश और अमेरिका, जापान तथा यूरोप जैसे देशों के साथ बढ़ती साझेदारियों के माध्यम से मजबूत गति हासिल कर चुका है। आने वाले 10 वर्ष इस गति को स्थायी राष्ट्रीय क्षमता में बदलने के लिए निर्णायक साबित होंगे।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह रोडमैप केवल एक रणनीतिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसके क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें अगले दशक की प्रमुख प्राथमिकताओं, आवश्यक नीतिगत हस्तक्षेपों और उन क्षेत्रों की पहचान की गई है जहां भारत वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर सकता है।


 

अन्य प्रमुख खबरें