Foreign Investment को बढ़ावा देने की बड़ी पहल: आरबीआई ने NRI-OCI के लिए बढ़ाई इक्विटी निवेश सीमा

खबर सार :-
आरबीआई के नए कदम विदेशी निवेश आकर्षित करने, निर्यात को बढ़ावा देने और वित्तीय बाजारों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। एनआरआई, ओसीआई और अन्य विदेशी निवेशकों के लिए निवेश नियमों में ढील से पूंजी प्रवाह बढ़ने की संभावना है। साथ ही सरकारी प्रतिभूतियों और बैंकिंग क्षेत्र को मिलने वाला समर्थन भारतीय अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती प्रदान कर सकता है।
Foreign Investment को बढ़ावा देने की बड़ी पहल: आरबीआई ने NRI-OCI के लिए बढ़ाई इक्विटी निवेश सीमा
खबर विस्तार : -

RBI Policy NRI OCI : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और भारतीय वित्तीय बाजारों को अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद बताया कि शेयर बाजार में कारोबार होने वाले इक्विटी साधनों में बिना सेबी पंजीकरण निवेश करने के लिए अनिवासी भारतीयों (NRI) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (OCI) की निवेश सीमा बढ़ाई जा रही है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। आरबीआई का मानना है कि इससे विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ेगा और घरेलू वित्तीय बाजारों को नई मजबूती मिलेगी।

सभी विदेशी व्यक्तिगत निवेशकों को मिलेगा लाभ

आरबीआई ने केवल एनआरआई और ओसीआई तक ही यह सुविधा सीमित नहीं रखी है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि अब सभी व्यक्तिगत विदेशी निवासी व्यक्तियों (पीआरओआई) को भी एनआरआई और ओसीआई के समान निवेश सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इस फैसले का उद्देश्य भारतीय पूंजी बाजार तक विदेशी निवेशकों की पहुंच को आसान बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय शेयर बाजार में विदेशी भागीदारी बढ़ेगी और निवेशकों का आधार व्यापक होगा।

पीएसयू के लिए विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा जारी

आरबीआई ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) जुटाने में मदद देने के लिए 30 सितंबर 2026 तक रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा जारी रखने का निर्णय लिया है। इसके अलावा अधिकृत डीलर (एडी) बैंकों को 3 से 5 वर्ष की नई एफसीएनआर (बी) जमा जुटाने के लिए पूरी हेजिंग लागत वहन करने की सुविधा भी इसी अवधि तक उपलब्ध रहेगी। इससे विदेशी मुद्रा संसाधन जुटाने में आसानी होगी और बैंकिंग प्रणाली को अतिरिक्त तरलता मिल सकेगी।

सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के नए अवसर

विदेशी निवेश को और बढ़ावा देने के लिए आरबीआई ने पूरी तरह सुलभ मार्ग (FAR) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के दायरे का विस्तार किया है। अब 15 वर्ष, 30 वर्ष और 40 वर्ष की अवधि वाली सभी नई सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। इससे विदेशी निवेशकों को लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड में निवेश करने का अधिक अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम सरकार की उधारी लागत को कम करने और दीर्घकालिक विदेशी निवेश आकर्षित करने में मददगार साबित हो सकता है।

Share Market-Foreign Investment

एफपीआई निवेश पर कई सीमाएं हटाई गईं

आरबीआई ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए भी राहत भरे कदम उठाए हैं। सामान्य मार्ग के तहत एफपीआई निवेश पर लागू अल्पकालिक निवेश सीमा, निवेश एकाग्रता सीमा और व्यक्तिगत प्रतिभूतियों से जुड़ी कई पाबंदियों को हटाने का फैसला किया गया है। इस बदलाव से विदेशी संस्थागत निवेशकों को निवेश रणनीति बनाने में अधिक लचीलापन मिलेगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय बॉन्ड और ऋण बाजार में विदेशी निवेश बढ़ सकता है।

निर्यातकों को भी मिली राहत

आरबीआई ने निर्यात आय की प्राप्ति के लिए निर्धारित समयसीमा को फिर से 9 महीने करने का प्रस्ताव रखा है। इससे निर्यातकों को वैश्विक व्यापार परिस्थितियों के अनुरूप काम करने में अधिक सुविधा मिलेगी। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इस कदम से निर्यात गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और विदेशी मुद्रा आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

भुगतान संतुलन को मिलेगा समर्थन

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि घोषित सभी उपायों का उद्देश्य देश के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को मजबूत बनाना है। विदेशी निवेश और निर्यात आय में वृद्धि से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को भी समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा घोषित कर लाभ और आरबीआई के नए कदम मिलकर सरकारी उधारी और वित्तीय बाजारों में विदेशी पूंजी आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Exchange Rate नीति में कोई बदलाव नहीं

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि देश की विनिमय दर नीति में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। गवर्नर ने कहा कि भारतीय रुपया बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर संचालित होता रहेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में सट्टेबाजी के कारण बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में आरबीआई वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और अव्यवस्थित बाजार गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

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