वैश्विक तनावों के बीच Indian Economy मजबूत, 682 अरब डॉलर के Forex Reserve ने बढ़ाया भरोसा

खबर सार :-
आरबीआई के अनुसार 682.2 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार भारत को वैश्विक आर्थिक झटकों से बचाने के लिए मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है। 11 महीने के आयात और 89 प्रतिशत से अधिक बाह्य ऋण कवरेज के साथ भारत की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है। विदेशी निवेश को प्रोत्साहन, स्थिर आर्थिक बुनियाद और सतर्क मौद्रिक नीति आने वाले समय में अर्थव्यवस्था को मजबूती देती रहेगी।
वैश्विक तनावों के बीच Indian Economy मजबूत, 682 अरब डॉलर के Forex Reserve ने बढ़ाया भरोसा
खबर विस्तार : -

Forex Reserves India: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद यह भरोसा जताते हुए कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 682.2 अरब डॉलर के बेहद मजबूत स्तर पर पहुंच चुका है, जो किसी भी बाहरी आर्थिक झटके का सामना करने में सक्षम है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति स्थिर बनी हुई है और विदेशी मुद्रा भंडार देश की वित्तीय मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में यह भंडार अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है।

11 महीने के आयात को कवर करने में सक्षम है Forex Reserve

संजय मल्होत्रा ने बताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार न केवल ऐतिहासिक रूप से मजबूत स्तर पर है, बल्कि यह लगभग 11 महीने के आयात को कवर करने की क्षमता भी रखता है। इसके अलावा यह देश के कुल बाह्य ऋण का 89 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कवर करता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार की यह स्थिति बेहद संतोषजनक मानी जाती है। इससे भारत को वैश्विक वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनाए रखने और किसी भी संभावित संकट का सामना करने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार निवेशकों के भरोसे को बढ़ाने के साथ-साथ रुपये की स्थिरता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।

Exchange rate पर आरबीआई का स्पष्ट रुख

आरबीआई गवर्नर ने विनिमय दर (Exchange rate) को लेकर केंद्रीय बैंक की नीति भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि आरबीआई रुपये के किसी विशेष स्तर या सीमा को लक्ष्य नहीं बनाता है। विनिमय दर का निर्धारण बाजार की मांग और आपूर्ति की शक्तियों के आधार पर होने दिया जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वैश्विक अनिश्चितताओं और सट्टेबाजी के दबावों के कारण कभी-कभी बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। ऐसी परिस्थितियों में आरबीआई का उद्देश्य बाजार आधारित गतिविधियों को रोकना नहीं, बल्कि अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करना और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना होता है।

West Asia crisis का असर, फिर भी भारत मजबूत

गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का प्रभाव दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, सप्लाई चेन में बाधाएं और वित्तीय बाजारों की अस्थिरता ने विकास दर और महंगाई के अनुमानों को प्रभावित किया है। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में बनी हुई है। मजबूत घरेलू मांग, निवेश गतिविधियां और सेवा क्षेत्र की स्थिरता भारतीय अर्थव्यवस्था को समर्थन प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आरबीआई लगातार वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर रखे हुए है और आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध सभी नियामकीय तथा बाजार आधारित उपायों का उपयोग करेगा।

Foreign investment बढ़ाने के लिए बड़े कदम

आरबीआई ने विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की हैं। गवर्नर ने बताया कि फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत अब 15 वर्ष, 30 वर्ष और 40 वर्ष की अवधि वाली नई सरकारी प्रतिभूतियों को भी शामिल किया जाएगा। इस कदम से विदेशी निवेशकों को भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में निवेश के अधिक अवसर मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ेगा और सरकार को दीर्घकालिक संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।

PSU को मिलेगा सस्ता विदेशी फंड

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) को बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) जुटाने में सहायता देने के लिए आरबीआई ने 30 सितंबर 2026 तक रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा जारी रखने का फैसला किया है। इस व्यवस्था के तहत कंपनियां अपेक्षाकृत कम लागत पर विदेशी मुद्रा में ऋण प्राप्त कर सकेंगी। इससे बुनियादी ढांचा, ऊर्जा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में निवेश को गति मिलने की संभावना है।

Repo Rate स्थिर, आरबीआई का तटस्थ रुख बरकरार

जैसा कि बाजार को उम्मीद थी, आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को अपरिवर्तित रखा और पॉलिसी स्टांस ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा। यह निर्णय दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना चाहता है। गवर्नर ने कहा कि घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए सतर्कता आवश्यक है। आने वाले महीनों में आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

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