नई दिल्लीः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति से दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल है। अमेरिकी सरकार की ओर से स्टील और एल्युमीनियम पर टैरिफ में बढ़ोत्तरी किए जाने पर मेक्सिको की राष्ट्रपति शिनबाम ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने इसे 'अनुचित', 'अस्थायी' और 'कानूनी आधार' पर गलत बताया है।
मेक्सिको की राष्ट्रपति शिनबाम ने कहा कि अमेरिका सरकार की टैरिफ में बढ़ोत्तरी की कार्रवाई यूनाइटेड किंगडम को छोड़कर सभी देशों पर लागू होती है, मेक्सिको के लिए पूरी तरह से अनुचित है। मेक्सिको जितना निर्यात करता है, उससे कहीं ज्यादा स्टील और एल्युमीनियम का आयात करता है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर घाटे की स्थिति में टैरिफ लगाया जाता है, लेकिन हम ज्यादा स्टील आयात करते हैं, इसलिए यह अनुचित है। इसके अलावा मेक्सिको और यूनाइटेड स्टेट्स एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में भागीदार हैं, इसलिए मेक्सिकन सरकार के नजरिए से टैरिफ का कोई कानूनी आधार ही नहीं है।
दरअसल, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सरकार का कहना है कि टैरिफ व्यापार की तुलना में राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं पर अधिक विचार करता है। इस पर मेक्सिको की राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के कारणों से इस पर विचार किया जा रहा है और व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि सुरक्षा मुद्दे सहित सभी मोर्चों पर मेक्सिको के साथ बहुत बेहतर सहयोग है। इसलिए हमें नहीं लगता कि यह सही है। ये टैरिफ अस्थिर साबित होगा, क्योंकि जैसे कई ऑटो पार्ट्स सीमा के एक तरफ से दूसरी तरफ जाते हैं, वैसा ही स्टील के साथ भी होता है।
मेक्सिको की राष्ट्रपति शिनबाम ने कहा कि वह टैरिफ के मुद्दे को लेकर इंडस्ट्री लीडर्स से मुलाकात करेंगी, ताकि आगे की रणनीतियां पेश की जा सकें। उनके इकोनॉमी सेक्रेटरी मार्सेलो एब्रार्ड, इस सप्ताह अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत की तैयारी कर रहे हैं, ताकि टैरिफ को लेकर एक समझौता हो सके। उन्होंने कहा कि स्टील और एल्यूमिनियम इंडस्ट्री पर पचास प्रतिशत टैरिफ एक बड़ा प्रभाव डालता है। इस सेक्टर में आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ पहले ही समस्याएं पैदा कर चुका है। अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो अगले सप्ताह उनकी सरकार यह घोषित करेगी कि कौन से कदम उठाए जाएंगे। यह आंख के बदले आंख की बात नहीं है। इसका उद्देश्य इंडस्ट्री और इसके द्वारा पैदा किए जाने वाले रोजगार को सपोर्ट करना है, जो बहुत जरूरी है। ऐसे में हमें उम्मीद है कि एक समझौता हो जाएगा। अगर नहीं हुआ, तो हम भी कुछ घोषित करेंगे। यह बदले की बात नहीं है। यह संरक्षण का मामला है।
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