नई दिल्लीः ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध में अमेरिका की एंट्री होने और अमेरिका की ओर से बी-2 बॉम्बर का इस्तेमाल कर ईरान के तीन सबसे प्रमुख परमाणु ठिकानों को तबाह करने के बाद स्थितियां बिगड़ गई हैं। अमेरिकी हमले के बाद सोमवार को तेल की कीमतें वर्ष 2025 में जनवरी के बाद से अब तक के पिछले पांच महीनों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इसकी एक और बड़ी वजह ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी देना है। दरअसल जलडमरूमध्य ही वो माध्यम है, जिससे वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत प्रवाह मध्य पूर्व के देशों में होता है। इसलिए कच्चे तेल के आज के कारोबार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 1.92 डॉलर या 2.49 प्रतिशत बढ़कर 78.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.89 डॉलर या 2.56 प्रतिशत बढ़कर 75.73 डॉलर पर पहुंच गया है। जबकि, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी 5 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्र्ज की गयी है। हालांकि, कीमतें उन स्तरों पर टिक नहीं पाईं और लगभग तुरंत ही शुरुआती बढ़त कम हो गई।
मध्य एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी भंडार में उम्मीद से अधिक गिरावट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे सप्ताह तेजी देखी जा रही है। इजराइल और ईरान के बीच चल रही शत्रुता ने मध्य पूर्व में कच्चे तेल की आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं को और अधिक बढ़ा दिया है, जो कि वैश्विक तेल का निर्यात करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। इस संबंध में यूएस एनर्जी इंफोर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी ईआईए का कहना है कि पिछले सप्ताह कच्चे तेल के भंडार में 11.5 मिलियन बैरल की गिरावट आई है, जो अनुमानित 2.3 मिलियन बैरल की गिरावट से बहुत अधिक है।
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की स्थितियों पर भारतीय उपभोक्ताओं की सभी आशंकाओं का समाधान किया है। उन्होंने कहा कि हम पिछले दो हफ्तों से मध्य पूर्व में विकसित हो रही भू-राजनीतिक स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम पिछले कुछ वर्षों में अपनी आपूर्ति में विविधता लाए हैं और अब हमारी आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से नहीं आता है। देश की तेल विपणन कंपनियों-इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के पास कई सप्ताह के लिए आपूर्ति है और उन्हें कई मार्गों से ऊर्जा आपूर्ति मिलती रहती है। तेल और गैस क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री पुरी ने पहले कहा था कि देश में अब 23 आधुनिक परिचालन रिफाइनरियां हैं, जिनकी कुल क्षमता 257 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जिससे पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री ने ईंधन की आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य/फारस की खाड़ी के उत्तरी किनारे पर स्थित है, जिसके माध्यम से सऊदी अरब और यूएई जैसे प्रमुख निर्यातक देशों से प्रतिदिन 20 मिलियन बैरल तेल का प्रवाह होता है। अब ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका, इजराइल के साथ संघर्ष में हस्तक्षेप करता है, तो वह इस मार्ग को अवरुद्ध कर देगा। मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष का सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई से तेल आपूर्ति पर प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, जिससे तेल की कीमतों में तेज उछाल आएगा। यही नहीं, शिपिंग भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है, क्योंकि यमन के हूती विद्रोहियों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो वे अमेरिकी जहाजों पर अपने हमले फिर से शुरू कर देंगे। यह भी सत्य है कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है और तेल की कीमतों में उछाल से उसके तेल आयात बिल में वृद्धि होती है और मुद्रास्फीति की दर बढ़ जाएगी, जो आर्थिक विकास को नुकसान पहुंचा सकती है। विदेशी मुद्रा के बड़े व्यय से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए में भी कमजोरी आ सकती है। हालांकि, भारत, रूस के साथ-साथ अमेरिका से आयात बढ़ाकर और रणनीतिक भंडार के माध्यम से मजबूती बनाकर अपने तेल स्रोतों में विविधता लाया है।
मेहता इक्विटीज लिमिटेड के उपाध्यक्ष कमोडिटीज राहुल कलंत्री ने कच्चे तेल को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि आज के सत्र में कच्चे तेल को 74.20-73.40 डॉलर पर समर्थन और 75.65-76.20 डॉलर पर प्रतिरोध देखने को मिल रहा है। जहां तर भारतीय मुद्रा रुपए की बात है, तो उसके संदर्भ में, कच्चे तेल को 6,400-6,320 रुपए पर समर्थन मिल रहा है, जबकि प्रतिरोध 6,580-6,690 रुपए पर है। अब भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका एक खतरा है, लेकिन यह भी ध्यान रखें कि जलडमरूमध्य कभी बंद नहीं हुआ। वहीं, जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से ईरान और ईरान के मित्र चीन को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। इसमें भारत कोई खास नुकसान नहीं होगा।
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