Stock Market News Update: क्रिसमस की छुट्टी के बाद सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में सुस्ती देखने को मिली। प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी मामूली गिरावट के साथ लगभग सपाट खुले। गुरुवार को बाजार बंद रहने और सप्ताह छोटा होने के कारण निवेशकों में नई पोजिशन बनाने को लेकर सतर्कता नजर आई। वैश्विक संकेतों की कमी और किसी बड़े घरेलू ट्रिगर के अभाव में शुरुआती कारोबार सीमित दायरे में सिमटा रहा।
शुरुआती सत्र में खबर लिखे जाने तक (करीब 9.20 बजे) 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 55 अंकों यानी 0.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ 85,360 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं, एनएसई निफ्टी 12.60 अंकों यानी 0.05 प्रतिशत की हल्की कमजोरी के साथ 26,126 के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया। बाजार की चाल से यह साफ दिखा कि निवेशक फिलहाल इंतजार और निगरानी की रणनीति अपना रहे हैं।
शुरुआती कारोबार में बीईएल, कोल इंडिया, अदाणी एंटरप्राइजेज, आयशर मोटर्स, सिप्ला और टाइटन जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली और ये टॉप गेनर्स में शामिल रहे। दूसरी ओर, सन फार्मा, श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, इटरनल और टाटा स्टील जैसे शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा, जिससे ये टॉप लूजर्स की सूची में रहे।
वृहद बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.21 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.08 प्रतिशत मजबूत रहा। इससे संकेत मिलता है कि चुनिंदा मिड और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है, हालांकि कुल मिलाकर बाजार का रुख सतर्क है।
सेक्टरल फ्रंट पर निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, केमिकल्स और एफएमसीजी इंडेक्स में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। वहीं, निफ्टी मीडिया में करीब 0.3 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक में लगभग 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे ये सेक्टर दबाव में रहे।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2025 के खत्म होने में अब केवल चार ट्रेडिंग दिन बचे हैं। जो तेजी पहले सांता रैली जैसी नजर आ रही थी, उसमें अब कमजोरी के संकेत मिलने लगे हैं। अमेरिका-भारत ट्रेड डील जैसे किसी बड़े सकारात्मक संकेत की कमी के चलते बाजार फिलहाल मौजूदा स्तरों के आसपास कंसॉलिडेट कर सकता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने 2025 की तीसरी तिमाही में 4.3 प्रतिशत की मजबूत जीडीपी ग्रोथ दर्ज की है, जिससे वहां के शेयर बाजार को सहारा मिल रहा है। एआई से जुड़ी अमेरिकी कंपनियों की मजबूत कमाई के कारण कुछ विदेशी निवेशक, खासकर हेज फंड, भारत में अल्पकालिक बिकवाली बढ़ा सकते हैं। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने में मदद कर सकती है। निवेशकों को अच्छी गुणवत्ता वाले लार्ज कैप शेयरों में गिरावट पर धीरे-धीरे निवेश बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
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