मुंबईः भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को अमेरिकी टैरिफ के असर के चलते लाल निशान में शुरुआत की। सुबह 9:18 बजे सेंसेक्स 197 अंक या 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,962 पर और निफ्टी 66 अंक या 0.27 प्रतिशत नीचे आकर 24,819 पर कारोबार कर रहा था। बाजार खुलते ही बिकवाली का माहौल बन गया, जिसमें फार्मा, हेल्थकेयर और आईटी सेक्टर प्रमुख रूप से प्रभावित हुए।
घरेलू शेयर बाजार में न केवल लार्जकैप, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 354 अंक या 0.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,201 पर था, वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 184 अंक या 1.03 प्रतिशत नीचे आकर 17,782 पर पहुंच गया।
बाजार में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित नया टैरिफ पैकेज माना जा रहा है। इस पैकेज में अमेरिका ने आयातित दवाओं पर 100 प्रतिशत, किचन कैबिनेट्स पर 50 प्रतिशत और भारी ट्रकों पर 25 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया है। यह फैसला वैश्विक व्यापार माहौल पर नकारात्मक असर डाल रहा है, खासतौर पर फार्मा सेक्टर पर, जो भारत के लिए निर्यात का प्रमुख क्षेत्र है। निफ्टी फार्मा इंडेक्स में 2.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो सेक्टर में निवेशकों की चिंता को दर्शाता है। इसके साथ ही आईटी और हेल्थकेयर इंडेक्स भी 1 प्रतिशत से अधिक नीचे थे।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल के बाजार भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी शेयर बाजार भी गुरुवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुआ था, जिससे वैश्विक निवेशकों की धारणा और कमजोर हुई है। सेंसेक्स पैक में एलएंडटी, टाटा मोटर्स, आईटीसी, मारुति सुजुकी, टाइटन और अल्ट्राटेक सीमेंट गेनर्स के रूप में उभरे, जबकि सन फार्मा, एशियन पेंट्स, इंफोसिस, पावर ग्रिड, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसी कंपनियां सबसे अधिक नुकसान में रहीं।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि अमेरिका द्वारा पेटेंट और ब्रांडेड दवाओं पर लगाए गए टैरिफ से भारत को तत्काल प्रभाव नहीं पड़ सकता, क्योंकि भारत मुख्यतः जेनेरिक दवाएं निर्यात करता है। लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि राष्ट्रपति ट्रंप भविष्य में जेनेरिक दवाओं को भी टारगेट करते हैं, तो यह भारतीय फार्मा सेक्टर के लिए बड़ा झटका हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने निवेशकों के मन में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। व्यापार नीति में अनपेक्षित बदलाव, खासतौर पर वैश्विक ताकतों द्वारा, भारतीय बाजार की स्थिरता को चुनौती दे सकते हैं।
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