नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर वार्ता जारी है, लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने किसानों और लघु उत्पादकों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। ये बातें शनिवार को ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025’ के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कही है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हमारी कुछ रेड लाइन्स हैं, जो हमारे किसानों और छोटे उत्पादकों से जुड़ी हैं। हम उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह सिर्फ नीति नहीं, बल्कि हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन भारत अपने मूलभूत हितों से पीछे नहीं हटेगा।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यह टिप्पणी उस समय की जब अमेरिका ने भारत पर 27 अगस्त से अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की योजना बनाई है, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो जाएगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तौर-तरीकों को ‘पारंपरिक सोच से अलग’ बताया और कहा कि ऐसे में भारत को भी संतुलित लेकिन सख्त रुख अपनाना होगा। इस कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट है—व्यापार समझौते करते समय राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होंगे। हम पूर्व-समझौतों के आधार पर बातचीत शुरू करते हैं, जिससे दोनों पक्षों की संवेदनशीलताओं का सम्मान हो सके।
वर्तमान में भारत यूरोपीय संघ के साथ भी सक्रिय वार्ता कर रहा है और कई प्रमुख समझौतों को अंतिम रूप देने की दिशा में है। गोयल ने भरोसा जताया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार के मोर्चे पर कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी, क्योंकि दोनों देशों के संबंध रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक व्यापार में एक विश्वसनीय और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। ऐसे में अमेरिका सहित अन्य देश भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी चाहते हैं। हालांकि, भारत अपनी आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादकों के हितों की अनदेखी नहीं कर सकता।
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