‘नीली क्रांति’ का कमाल: भारत में मछली उत्पादन 106% उछला, 197.75 लाख टन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, बजट में 2761 करोड़ का बूस्ट

खबर सार :-
भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र तेज विकास की मिसाल बनकर उभरा है, जहां उत्पादन, निर्यात और रोजगार तीनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और मजबूत बुनियादी ढांचे ने इसे नई ऊंचाई दी है। यदि यही गति बनी रही, तो भारत वैश्विक मत्स्य उद्योग में और मजबूत नेतृत्व स्थापित कर सकता है।

‘नीली क्रांति’ का कमाल: भारत में मछली उत्पादन 106% उछला, 197.75 लाख टन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, बजट में 2761 करोड़ का बूस्ट
खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र अब सिर्फ एक पारंपरिक गतिविधि नहीं, बल्कि तेजी से उभरता हुआ आर्थिक इंजन बन चुका है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश का कुल मछली उत्पादन बढ़कर 197.75 लाख टन तक पहुंच गया है, जो 2013-14 के 95.79 लाख टन के मुकाबले 106 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि को दर्शाता है। इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है और वैश्विक उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत योगदान दे रहा है।

बजट 2026-27 में ऐतिहासिक निवेश

सरकार ने इस क्षेत्र की बढ़ती अहमियत को देखते हुए केंद्रीय बजट 2026-27 में 2,761.80 करोड़ रुपये की अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक सहायता प्रस्तावित की है। इसमें से 2,500 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के लिए आवंटित किए गए हैं। यह योजना मत्स्य उत्पादन, बुनियादी ढांचे और वैल्यू चेन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।

‘नीली क्रांति’ से बदली तस्वीर

मत्स्य क्षेत्र की इस जबरदस्त सफलता के पीछे नीली क्रांति का बड़ा योगदान रहा है, जिसे 2015 में शुरू किया गया था। इसके बाद 2020 में लॉन्च हुई प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने इस क्षेत्र को नई गति दी। इन योजनाओं के तहत हजारों तालाब, जलाशय पिंजरे, कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट यूनिट्स का विकास हुआ है, जिससे उत्पादन और सप्लाई चेन दोनों मजबूत हुए हैं।

निर्यात में भी जबरदस्त उछाल

भारत का समुद्री खाद्य निर्यात भी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 62,408 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। जमे हुए झींगे (फ्रोजन श्रिम्प) भारत के प्रमुख निर्यात उत्पाद बने हुए हैं। अमेरिका और चीन भारतीय समुद्री उत्पादों के सबसे बड़े बाजार के रूप में उभरे हैं, जिससे विदेशी मुद्रा आय में भी बड़ा इजाफा हुआ है।

रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मत्स्य पालन क्षेत्र आज तटीय और ग्रामीण इलाकों में रोजगार, आय और खाद्य सुरक्षा का बड़ा स्रोत बन चुका है। कृषि सकल मूल्य वर्धित (GVA) में इसकी हिस्सेदारी करीब 7.43 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र की ताकत को दर्शाती है। 2014-15 के बाद से इस सेक्टर में लगभग 74.66 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रहा है।

मछुआरों को मिल रहा सीधा लाभ

सरकार की योजनाओं के जरिए अब तक 4.39 लाख मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का लाभ मिल चुका है। इसके अलावा 33 लाख से अधिक लोगों को बीमा सुरक्षा और करीब 7.44 लाख मछुआरा परिवारों को आजीविका सहायता प्रदान की गई है। ये पहलें न केवल मछुआरों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना रही हैं, बल्कि उन्हें जोखिम से भी सुरक्षा दे रही हैं।

आधुनिक तकनीक से बढ़ रहा उत्पादन

मत्स्य पालन में आधुनिक तकनीकों का तेजी से उपयोग बढ़ रहा है। 5 मार्च 2026 तक PMMSY के तहत 23,285 हेक्टेयर तालाब क्षेत्र, 52,058 जलाशय पिंजरे और 27,189 मछली परिवहन इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है। इसके अलावा, 902.97 करोड़ रुपये के निवेश से 12,081 RAS (रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम) इकाइयां और 523.30 करोड़ रुपये से 4,205 बायो-फ्लॉक इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। ये तकनीकें उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने में मददगार साबित हो रही हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास फोकस

सरकार बंदरगाह, लैंडिंग सेंटर, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग यूनिट और मार्केटिंग नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इससे न केवल मछली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों को बेहतर कीमत भी मिलेगी और वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा भी मजबूत होगी।

 

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