Venezuela Oil Production: वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित कच्चे तेल का भंडार होने के बावजूद वहां तेल उत्पादन लगातार निराशाजनक बना हुआ है। तकनीकी ज्ञान की कमी, पर्याप्त निवेश का अभाव, सरकारी दखल, खराब प्रबंधन, भ्रष्टाचार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने देश की तेल उद्योग की कमर तोड़ दी है। हाल ही में जारी पीएल कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी कारणों के चलते वेनेजुएला अपने विशाल तेल संसाधनों का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पा रहा है।
नए साल की शुरुआत में वेनेजुएला में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब अमेरिकी सेना की कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि मादुरो 2013 से सत्ता में थे और उन्होंने अधिकांश फैसले अध्यादेशों के जरिए लिए। इस अचानक बदले राजनीतिक परिदृश्य से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर कीमतों और आपूर्ति पर पड़ सकता है।
पीएल कैपिटल के रिसर्च एनालिस्ट स्वर्णेंदु भूषण के अनुसार, वेनेजुएला के पास अनुमानित 303.8 अरब बैरल (2020) का प्रमाणित तेल भंडार है। यह सऊदी अरब के 297.5 अरब बैरल से भी अधिक है। इसके बाद कनाडा, ईरान और इराक का स्थान आता है। इसके बावजूद वेनेजुएला का वास्तविक उत्पादन इन देशों की तुलना में काफी कम है, जो उसके लिए सबसे बड़ी विडंबना है।
अगर तेल खपत की बात करें तो अमेरिका दुनिया में सबसे बड़ा उपभोक्ता है, लेकिन उसके पास केवल 68.8 अरब बैरल का तेल भंडार है। इसके बावजूद अमेरिका प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ 37 लाख बैरल तेल का उत्पादन करता है। नवंबर 2025 में वेनेजुएला का दैनिक उत्पादन मात्र 10 लाख बैरल रहा, जबकि सऊदी अरब में यह आंकड़ा करीब 97 लाख बैरल प्रतिदिन का था।
रिपोर्ट बताती है कि 1970 के दशक में वेनेजुएला दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल था। उस समय यहां प्रतिदिन 37 लाख बैरल तेल का उत्पादन होता था। हालांकि यह अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ से कम था, लेकिन सऊदी अरब के बाद वेनेजुएला की स्थिति मजबूत मानी जाती थी। बीते एक दशक में उत्पादन घटकर लगभग एक-तिहाई रह गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने का कोई त्वरित या “जादुई” समाधान नहीं है। बुनियादी ढांचे, तकनीक और निवेश में सुधार के शुरुआती संकेत दिखने में भी कम से कम तीन से छह महीने लग सकते हैं। इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में हल्का उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, खासकर रूस और चीन की प्रतिक्रिया के आधार पर।
रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 60 डॉलर प्रति बैरल होने से भारत की तेल खोज और उत्पादन कंपनियों—ओएनजीसी और ऑयल इंडिया—को फायदा मिल सकता है। वहीं, तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) भी कम कीमतों के कारण अपनी मार्जिन बनाए रख सकती हैं।
हालांकि रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि हाल ही में सिगरेट पर टैक्स बढ़ने के बाद सरकार पेट्रोल और डीजल पर भी टैक्स बढ़ा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर तेल कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है। इसलिए मौजूदा हालात में निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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