नई दिल्लीः केंद्र सरकार की दूरदर्शी नीतियों के कारण भारत हर सेक्टर में अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। यहां पिछले 11 वर्षों में अंतर्देशीय उत्पादन 142 प्रतिशत बढ़कर 147 लाख टन हो गया है। मत्स्य पालन क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर 9 प्रतिशत है, जो सभी कृषि से जुड़े क्षेत्रों में सबसे अधिक है। केंद्रीय मंत्री ने नीली क्रांति, मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (एफआईडीएफ), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, पीएम-मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन ने 'अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि सम्मेलन 2025' के दौरान राज्यों से एफआईडीएफ का बेहतर उपयोग करने, आईसीएआर के साथ मिलकर कार्यान्वयन कैलेंडर की योजना बनाने और शीतजल मत्स्य पालन, सजावटी मत्स्य पालन और खारे जलीय कृषि का विस्तार कर निर्यात बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने पोषण में सुधार, उत्पादन को बढ़ावा देने और विकसित भारत के दृष्टिकोण में योगदान देने के लिए अंतर्देशीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित किया। केंद्रीय मंत्री सिंह ने मत्स्य पालन क्षेत्र में अंतर्देशीय राज्यों द्वारा की गई सराहनीय प्रगति की सराहना की और उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित भी किया।
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने कहा कि मत्स्य पालन किसानों की आय दोगुनी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सभी हितधारकों के प्रयासों की प्रशंसा की। इस कार्यक्रम में डिजिटल टूल, वैल्यू एडिशन और मछली पकड़ने के बाद की गतिविधियों में काम करने वाले 300 से अधिक मत्स्य पालन स्टार्ट-अप के लिए भी समर्थन को प्रोत्साहित किया गया। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने पोषण सुरक्षा, ग्रामीण समृद्धि और स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने में अंतर्देशीय मत्स्य पालन की परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान को इनोवेशन के साथ इंटीग्रेट करने, देशी प्रजातियों को बढ़ावा देने और सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से समुदायों को सशक्त बनाने के महत्व को रेखांकित किया। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने क्षेत्र की उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए आईसीएआर के सहयोग से गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और ब्रूड बैंक विकसित करने की जरूरत पर बल दिया।
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