तेहरानः मध्य एशिया में पिछले कई दिनों से तनाव की स्थिति बनी हुई है। ईरान ने इजराइल के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी है। इस वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी उथ-पुथल साफ दिखाई दे रही है। तेल और पेट्रोल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
वैश्विक बाजार में अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों में 2.9 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है, जो अब 73.90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। जनवरी के अंत के बाद यह कच्चे तेल की कीमतों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है है। इससे पूर्व 16 जून को कच्चे तेल की कीमतों में 1.7 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी, लेकिन ईरान और इजराइल के बीच ताजा तनाव बढ़ने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आ गई है। आंकड़ों पर गौर करें, तो पिछले सप्ताह इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए अभूतपूर्व हवाई हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 13 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई थी, जो कि अक्टूबर 2022 के बाद का सबसे बड़ा साप्ताहिक उछाल माना गया था। कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर पेट्रोल पंपों पर भी दिखने लगा है। अमेरिका में रेगुलर गैसोलिन का औसत मूल्य तीन सेंट की छलांग लगाकर 3.17 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गया है, जो आम नागरिकों के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है।
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