नई दिल्लीः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियां निवेशकों को रास नहीं आ रही हैं। इस वजह से अमेरिका से व्यापार को लेकर दुनिया के अनेकों देशों की रुचि कम होने लगी है। ट्रंप सरकार की ओर से विभिन्न देशों पर लगाए गए रेसिप्रोकल आयात शुल्क के कारण डॉलर सूचकांक में भी तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। यह सूचकांक तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिसकी वजह से रुपये की कीमतों में सोमवार को 33 पैसे की बढ़त देखी गई। अब इंडियन करेंसी (INR) यानी रुपया 85.05 प्रति डॉलर के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है।
आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख और विदेशी पूंजी प्रवाह से निवेशकों की धारणा को काफी बल मिल रहा है। घरेलू संकेतकों में उत्साहवर्धक सुधार तथा वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव के कारण पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में भारतीय रुपये में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके कारण रुपया कुछ दिनों से डॉलर के मुकाबले मजबूत बना हुआ है। वहीं, दूसरी तरफ प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में अनिश्चितता का माहौल है। यही नहीं, अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 85.15 प्रति डॉलर पर खुला और शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले 85.05 पर पहुंच गया है, जो पिछले बंद भाव से 33 पैसे की मजबूती को दर्शाता है।
बता दें, पिछले सप्ताह कारोबारी सत्र के आखिरी दिन यानी गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 26 पैसे मजबूती के साथ रुपया 85.38 पर था। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.92 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.31 पर रहा। अंतर्राष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 1.47 प्रतिशत गिरकर 66.96 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर था।
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