2027 तक देशभर में 5,000 ई85 फ्यूल स्टेशन: फ्लेक्स-फ्यूल क्रांति से बदलेगी भारत की मोबिलिटी

खबर सार :-
भारत में ई85 फ्यूल स्टेशन नेटवर्क का विस्तार स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 2027 तक 5,000 स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य देश के परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है। फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के बढ़ते उपयोग से तेल आयात पर निर्भरता घटेगी, पर्यावरण को लाभ मिलेगा और एथेनॉल आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
2027 तक देशभर में 5,000 ई85 फ्यूल स्टेशन: फ्लेक्स-फ्यूल क्रांति से बदलेगी भारत की मोबिलिटी
खबर विस्तार : -

E85 Fuel Station: भारत में स्वच्छ ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने कहा है कि सरकार वर्ष 2027 के अंत तक देशभर में 5,000 ई85 फ्यूल स्टेशन स्थापित करेगी। इस पहल का उद्देश्य एथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग को बढ़ाना, कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।

नई दिल्ली में आयोजित फ्लेक्स-फ्यूल वाहन लॉन्च कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने बताया कि शुरुआती चरण में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे प्रमुख शहरों में करीब 100 ई85 ईंधन वितरण स्टेशन शुरू किए जाएंगे। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।

क्या है E85 ईंधन और क्यों है खास?

ई85 एक विशेष प्रकार का ईंधन मिश्रण है, जिसमें 85 प्रतिशत तक एथेनॉल और शेष पेट्रोल होता है। इसे विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए तैयार किया गया है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने इसे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए मानक ईंधन के रूप में मान्यता दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल आधारित ईंधन जीवाश्म ईंधनों की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है और देश को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलती है। सरकार का दावा है कि कई परिस्थितियों में ई85 ईंधन इलेक्ट्रिक वाहनों के विकल्प के रूप में भी प्रभावी साबित हो सकता है।

दिसंबर 2026 तक 500 स्टेशन, फिर 5,000 का लक्ष्य

हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि ई85 इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विकसित किया जाएगा। सरकार ने दिसंबर 2026 तक 500 ई85 फ्यूल स्टेशन शुरू करने का लक्ष्य तय किया है। इसके बाद विस्तार अभियान को और गति देते हुए 2027 के अंत तक देश के प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में 5,000 स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। यह योजना भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि जैसे-जैसे ई85 की उपलब्धता बढ़ेगी, वैसे-वैसे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की मांग भी बढ़ेगी।

दोपहिया से चारपहिया तक पहुंची फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक: Nitin Gadkari

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक अब केवल दोपहिया वाहनों तक सीमित नहीं है। देश में चारपहिया वाहन निर्माता कंपनियां भी इस तकनीक को अपनाने लगी हैं। इससे पूरे फ्लेक्स-फ्यूल इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी और वैकल्पिक ईंधन का बाजार तेजी से विकसित होगा। कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने भी उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में अधिक वाहन निर्माता कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल सेगमेंट में प्रवेश करेंगी। उनका मानना है कि भारत तेजी से स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन प्रणाली की ओर बढ़ रहा है।

Flex-fuel technology: किसानों की आय और पर्यावरण दोनों को होगा लाभ

सरकार के अनुसार यदि देश में बिकने वाले नए दोपहिया और चारपहिया वाहनों में से 50 प्रतिशत फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक अपनाते हैं, तो अतिरिक्त 311.8 करोड़ लीटर एथेनॉल की मांग पैदा होगी। इससे कृषि क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा। अनुमान है कि किसानों की आय में लगभग 12,403 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है। साथ ही करीब 66.4 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की संभावना है। सरकार इसे किसानों के लिए आय के नए अवसर और पर्यावरण संरक्षण के दोहरे लाभ के रूप में देख रही है।

Geopolitical Tension: बढ़ती तेल कीमतों के बीच रणनीतिक कदम

ई85 को बढ़ावा देने की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैकल्पिक ईंधन का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एथेनॉल आधारित ईंधन देश के आयात बिल को कम करने में मदद करेगा और किसानों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़कर उन्हें ‘अन्नदाता’ के साथ-साथ ‘ऊर्जादाता’ भी बनाएगा।

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