भारत-अमेरिका संबंधों को व्यापार समझौते से मिली नई रफ्तार, एआई और रक्षा सहयोग पर बढ़ा जोर
खबर सार :-
अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता पूरा होने वाला है। दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और मजबूत सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ा रहे हैं। अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम लीडरशिप समिट में इस पर आम सहमति बनी। 2030 तक दोनों देशों का आपसी व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य सप्लाई चेन, इन्वेस्टमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और स्किल्ड टैलेंट के करीबी इंटीग्रेशन पर निर्भर करेगा।
खबर विस्तार : -
वाशिंगटन : अमेरिका और भारत के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी में बढ़ते भरोसे का अनुमान लगाते हुए कहा कि लंबे समय से इंतजार किया जा रहा द्विपक्षीय व्यापार समझौता पूरा होने वाला है। दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और मजबूत सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ा रहे हैं।
यूएसआईएसपीएफ लीडरशिप समिट में बनी आम सहमति
अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम (यूएसआईएसपीएफ) लीडरशिप समिट में इस पर आम सहमति बनी, जहां दोनों सरकारों के अधिकारियों, कानून बनाने वालों और बिजनेस लीडर्स ने बताया कि यह संबंध तकनीक, निवेश और साझा रणनीतिक हितों से प्रेरित होकर एक नए दौर में पहुंच रहा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अपने आखिरी चरण में पहुंच गई है।
भारत के आर्थिक बदलाव ने वैश्विक विकास, भरोसेमंद साझेदारी को बनाया जरूरी सहारा
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि भारत के आर्थिक बदलाव ने इसे वैश्विक विकास, स्थिरता और भरोसेमंद साझेदारी का एक जरूरी सहारा बना दिया है। उन्होंने कहा कि लगातार सुधार, मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोतरी और उच्च तकनीक में निवेश ने भारत को इस दशक के आखिर तक 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर ला खड़ा किया है।
क्वात्रा ने बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी को भारत-अमेरिका सहयोग के अगले मोर्चों के तौर पर पहचाना और कहा कि 2030 तक दोनों देशों का आपसी व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य सप्लाई चेन, इन्वेस्टमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और स्किल्ड टैलेंट के करीबी इंटीग्रेशन पर निर्भर करेगा।
भारत के साथ साझा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेवलपर इकोसिस्टम विकसित करेगा अमेरिका
पूरे समिट में चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा को लेकर खास तौर पर बात हुई। अमेरिका के आर्थिक विकास, ऊर्जा और पर्यावरण के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने इंजीनियरिंग टैलेंट में भारत को दुनिया का एकमात्र ऐसा देश बताया जो असल में चीन को टक्कर देता है और इसे भरोसेमंद तकनीकी इकोसिस्टम बनाने में अमेरिका का सबसे जरूरी लॉन्ग-टर्म साझेदार बताया। हेलबर्ग ने कहा कि वाशिंगटन चीन से आगे जरूरी तकनीकी सप्लाई चेन में विवधिकरण लाना चाहता है। इसके साथ ही भारत के साथ मिलकर एक साझा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेवलपर इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है।
भारत में मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च ऑपरेशन बढ़ा रही हैं अमेरिकी कंपनियां
अपनी शुरुआती बातों में, यूएसआईएसपीएफ के अध्यक्ष मुकेश अघी ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां चुपचाप चीन पर निर्भरता कम कर रही हैं और भारत में मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च ऑपरेशन बढ़ा रही हैं। समिट में नई दिल्ली के साथ करीबी संबंधों के लिए वाशिंगटन में दोनों पार्टियों के समर्थन पर भी जोर दिया गया। रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेन्स ने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर ही एकमात्र ऐसा कॉम्बिनेशन हैं जो इनोवेशन में चीन के लेवल की बराबरी कर सकते हैं।
डेमोक्रेटिक सेनेटर मार्क वार्नर ने भारत को लंबे समय में अमेरिका के शीर्ष दो या तीन रणनीतिक साझेदारों में से एक बताया। डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि रो खन्ना ने कहा कि यह संबंध आखिर में साझा डेमोक्रेटिक मूल्यों के साथ-साथ बढ़ते रक्षा और आर्थिक सहयोग पर आधारित होना चाहिए।
पारंपरिक फोकस से आगे बढ़ गए हैं डिप्लोमेसी-डिफेंस पर भारत-अमेरिका के संबंध
पूर्व अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर ने मौजूदा संबंधों को ऐतिहासिक संदर्भ में रखते हुए लोगों के बीच के जुड़ाव को 'सीक्रेट सॉस' बताया, जिसने दशकों तक दोनों देशों के संबंधों को बनाए रखा। उन्होंने यूएसआईएसपीएफ की यादगार कॉफी टेबल बुक, 'वी द पीपल: 250 वॉयसेज दैट हैव शेप्ड द यूएस-इंडिया रिलेशनशिप' भी लॉन्च की। बातचीत में यह बात सामने आई कि भारत-अमेरिका के संबंध डिप्लोमेसी और डिफेंस पर अपने पारंपरिक फोकस से कहीं आगे बढ़ गए हैं। अधिकारियों और बिजनेस लीडर्स ने बार-बार तकनीक, सप्लाई चेन की मजबूती, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा सुरक्षा और निवेश को संबंध के अगले चरण की तय प्राथमिकता बताया।
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