पश्चिम बंगालः 2021 चुनाव बाद हिंसा पर सीएम सुवेंदु का बड़ा ऐलानः हिंसा में मारे गए लोगों के परिवार वालों को मिलेगी नौकरी
खबर सार :-
2021 बंगाल चुनाव के बाद हुई हिंसा का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा पीड़ित परिवारों को नौकरी देने का वादा जहां राहत का संदेश माना जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक लाभ से जोड़कर देख रहा है। फाल्टा सीट पर दोबारा मतदान और चुनाव आयोग की सक्रियता ने भी इस पूरे घटनाक्रम को और अहम बना दिया है।
खबर विस्तार : -
CM Suvendu Big Promise: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2021 विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि चुनाव बाद हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को नौकरी दी जाएगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि हिंसा का शिकार हुए पार्टी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों की हरसंभव मदद की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में एक जनसभा के दौरान की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उन परिवारों के साथ खड़ी रहेगी जिन्होंने राजनीतिक हिंसा में अपने प्रियजनों को खोया है। इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में नया सियासी माहौल बनता दिखाई दे रहा है।
पीड़ित कार्यकर्ताओं की सूची मांगी
मुख्यमंत्री ने फाल्टा से भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा को निर्देश दिया कि वे उन कार्यकर्ताओं की सूची तैयार कर भेजें जो कथित तौर पर पिछली सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों द्वारा हिंसा और अत्याचार का शिकार हुए थे। उन्होंने कहा कि सूची मिलने के बाद सभी पीड़ितों को सरकारी स्तर पर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “आपके मुख्यमंत्री हमेशा आपके साथ खड़े रहेंगे। जिन परिवारों ने नुकसान झेला है, उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।” मुख्यमंत्री के इस बयान को चुनावी माहौल में बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
भाजपा का दावा-321 कार्यकर्ताओं की गई थी जान
भाजपा लगातार दावा करती रही है कि 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद हुई हिंसा में उसके 321 कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी। पार्टी का आरोप है कि चुनाव परिणाम आने के बाद कई जिलों में व्यापक हिंसा हुई थी, जिसमें भाजपा समर्थकों को निशाना बनाया गया। हालांकि उस समय राज्य सरकार और सत्ताधारी दल ने इन आरोपों को खारिज किया था। लेकिन अब एक बार फिर यह मुद्दा चुनावी मंचों पर जोर पकड़ता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच प्रमुखता से उठा रही है।
फाल्टा सीट पर दोबारा मतदान बना चर्चा का विषय
फाल्टा विधानसभा सीट हाल के दिनों में चुनावी विवादों के कारण सुर्खियों में रही। यहां दूसरे चरण के मतदान के दौरान कई शिकायतें सामने आई थीं। आरोप लगाया गया था कि कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम में भाजपा उम्मीदवार के नाम और चुनाव चिह्न के सामने लगे बटन सफेद टेप से ढक दिए गए थे। इन आरोपों के बाद मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विशेष चुनाव पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने फाल्टा का दौरा किया और घटनास्थल पर जाकर जांच की। वर्तमान में वे मुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में भी कार्य कर रहे हैं।
चुनाव आयोग ने दिए दोबारा मतदान के आदेश
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए पूरी फाल्टा विधानसभा सीट पर पुनर्मतदान कराने का आदेश दिया। आयोग का मानना था कि मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करना आवश्यक है। अब फाल्टा सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान होगा, जबकि चुनाव परिणाम 24 मई को घोषित किए जाएंगे। चुनाव आयोग के इस फैसले को विपक्ष ने लोकतंत्र की जीत बताया है, वहीं सत्ताधारी दल ने इसे संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा करार दिया है।
बंगाल की राजनीति में फिर गरमाया हिंसा का मुद्दा
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा लंबे समय से बड़ा मुद्दा रही है। चुनावों के दौरान और उसके बाद हिंसा के आरोप लगातार लगते रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा पीड़ित परिवारों को नौकरी देने का वादा राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन विपक्ष इसे चुनावी रणनीति के तौर पर भी देख रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बंगाल की राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है।
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