झांसी में डिजिटल स्क्रीनिंग से घर बैठे हो रही टीबी की पहचान, लोगों को बड़ी राहत
खबर सार :-
भारत सरकार टीबी को खत्म करने के लिए एक अभियान चला रही है। टीबी डिपार्टमेंट को एक मॉडर्न हैंडहेल्ड पोर्टेबल एक्स-रे मशीन दी गई है, जिससे लोगों को काफी राहत मिल रही है।
खबर विस्तार : -
झांसीः भारत सरकार के टीबी मुक्त भारत अभियान को गति देने के लिए झांसी में आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। क्षय रोग उन्मूलन अभियान के तहत जिले में हैंडहेल्ड पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के माध्यम से गांव-गांव जाकर टीबी की जांच की जा रही है। इस नई व्यवस्था से लोगों को घर के पास ही जांच की सुविधा मिल रही है, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।
80 मरीजों का हो सकता है एक्स-रे
प्रदेश सरकार द्वारा झांसी के क्षय रोग विभाग को क्षय रोग दिवस के अवसर पर चार आधुनिक हैंडहेल्ड पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें उपलब्ध कराई गई थीं। इन मशीनों की मदद से विभागीय टीमें गांवों में पहुंचकर संभावित मरीजों की स्क्रीनिंग कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक पोर्टेबल मशीन से प्रतिदिन लगभग 80 मरीजों का एक्स-रे किया जा सकता है। जिले में कुल चार मशीनें होने के कारण रोजाना करीब 320 लोगों की जांच संभव हो पा रही है।
24 मार्च से अब तक इन मशीनों के जरिए लगभग 13 हजार लोगों के एक्स-रे किए जा चुके हैं। जांच के दौरान 67 मरीजों में टीबी संक्रमण की पुष्टि हुई है। समय पर बीमारी की पहचान होने से मरीजों का इलाज भी जल्द शुरू किया जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने की संभावना कम हो रही है।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने दी जानकारी
पहले टीबी की जांच के लिए मरीजों को जिला अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक जाना पड़ता था। दूरदराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को जांच कराने में समय और धन दोनों खर्च करने पड़ते थे। लेकिन अब गांव और घर के पास ही स्क्रीनिंग होने से मरीजों को काफी राहत मिल रही है।
जिला क्षय रोग अधिकारी U N सिंह ने बताया कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के आने से टीबी मरीजों की पहचान करना पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है। उन्होंने कहा कि लक्षित मरीजों में संक्रमण को जल्दी पकड़ने में यह तकनीक बेहद प्रभावी साबित हो रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमों को अच्छा सहयोग मिल रहा है और लोग जांच कराने के लिए आगे आ रहे हैं। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोगों की समय रहते जांच हो सके ताकि टीबी जैसी गंभीर बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।
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