कोलकाता: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को अदालत में पेशी के दौरान कारोबारी सोना पप्पू के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। केंद्रीय जांच एजेंसी ने दावा किया कि सोना पप्पू धमकी और दबाव बनाकर लोगों की जमीन और संपत्तियां बाजार मूल्य से बेहद कम कीमत पर अपने कब्जे में लेते थे।
ईडी ने अदालत में कहा कि यह काम अकेले सोना पप्पू नहीं करते थे, बल्कि तीन लोगों का एक संगठित गिरोह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। जांच एजेंसी के अनुसार, बेहाला के कारोबारी जय कामदार और कोलकाता पुलिस के डीसी शांतनु सिन्हा विश्वास के लिए सोना पप्पू काम करते थे और कथित भूमि सिंडिकेट के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
लगातार नौ घंटे की पूछताछ के बाद सोमवार रात ईडी ने सोना पप्पू को गिरफ्तार किया था। मंगलवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां ईडी ने 10 दिनों की हिरासत की मांग की। वहीं, सोना पप्पू की ओर से जमानत याचिका दायर की गई। अदालत में ईडी के वकील ने दावा किया कि सोना पप्पू के खिलाफ रंगदारी, धमकी, जमीन कब्जा और अवैध हथियार रखने समेत कई गंभीर आरोप हैं। जांच एजेंसी ने उन्हें इन मामलों का मुख्य आरोपित बताया। ईडी ने यह भी कहा कि सोना पप्पू के घर पर छापेमारी के दौरान एक रिवॉल्वर बरामद किया गया था, जिसे कथित तौर पर जय कामदार की कंपनी के नाम पर खरीदा गया था। एजेंसी का दावा है कि रिवॉल्वर खरीदे जाने के बाद रवींद्र सरोवर थाना क्षेत्र के कांकुलिया इलाके में हिंसा की घटना हुई थी।
सोना पप्पू के वकील ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हथियार खरीदने के लिए सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि फरवरी में कांकुलिया में हुई हिंसा में उनके मुवक्किल को गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि जब धमकी देकर जमीन खरीदी जाती थी तो शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई गई। इस पर ईडी के वकील ने बताया कि सोना पप्पू का गिरोह बुजुर्ग और अकेले रहने वाले नागरिकों को टारगेट करता था जो भय और दबाव में मुंह नहीं खोलते थे।
ईडी के अनुसार, यह गिरोह बेहद कम कीमत पर संपत्तियां खरीदता था और निर्माण कार्य के लिए आपराधिक ताकत का इस्तेमाल किया जाता था। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि कई संपत्तियां बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर खरीदी गईं। उदाहरण के तौर पर, एक ऐसी जमीन जिसका बाजार मूल्य 7.7 करोड़ रुपये था, उसे केवल एक करोड़ रुपये में खरीदा गया। सोना पप्पू के वकील ने अदालत में सवाल उठाया कि यदि जमीनें जबरन कम कीमत पर खरीदी गई थीं, तो संपत्ति मालिकों ने शिकायत क्यों नहीं की। इस पर ईडी ने कहा कि गिरोह मुख्य रूप से बुजुर्ग लोगों को निशाना बनाता था, जो दबाव और भय के कारण विरोध नहीं कर पाते थे।
सोना पप्पू की ओर से अदालत में कहा गया कि व्यवसाय करना कोई अपराध नहीं है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि यह जांच की जानी चाहिए कि उनके व्यवसाय से अर्जित धन का किसी भ्रष्टाचार से कोई संबंध है या नहीं। उनके वकील ने दावा किया कि ईडी जिन मामलों के आधार पर जांच कर रही है, उनमें उनके मुवक्किल ने कोई अवैध कमाई नहीं की और उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
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