RG Kar Medical College case: 'रेप-मर्डर केस से जुड़ी सभी जगह को करें सील', कलकत्ता हाईकोर्ट ने CBI को दिए निर्देश
खबर सार :-
आरजी कर मेडिकल काॅलेज में महिला जूनियर डाॅक्टर से रेप व मर्डर केस में कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीबीआई को इससे संबंधित हर जगह को सील करने के आदेश दिए हैं।
खबर विस्तार : -
कोलकाता: कलकत्ता हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने मंगलवार को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को निर्देश दिया कि वह उत्तरी कोलकाता में स्थित R.G. Kar Medical College and Hospital के परिसर के भीतर उन सभी जगहों को तुरंत सील कर दे, जिनका अगस्त 2024 में हुई एक महिला जूनियर डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना से कोई भी संबंध हो सकता है।
जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को इस मामले पर अपनी पहली सुनवाई पूरी की। बेंच ने CBI को विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि अस्पताल के उस सेमिनार रूम पर लगी सील बरकरार रहे, जहां 9 अगस्त 2024 की सुबह पीड़िता का शव मिला था। कोर्ट ने CBI को अस्पताल परिसर के भीतर अन्य संदिग्ध जगहों को भी सील करने का आदेश दिया। इनमें अस्पताल के तत्कालीन प्रिंसिपल संदीप घोष का ऑफिस और चैंबर भी शामिल है। इस मामले के अलावा संदीप घोष का नाम अस्पताल में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं से भी जुड़ चुका है।
21 मई को होगी अगली सुनवाई
पीड़िता के परिवार द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, कोर्ट ने CBI के वकील से पूछा कि क्या सेमिनार रूम अभी भी सील है। जब CBI के वकील ने पुष्टि की कि सील बरकरार है, तो पीड़िता के परिवार के वकील ने कोर्ट को बताया कि संदीप घोष का ऑफिस और चैंबर सील नहीं किया गया है। इसके जवाब में, डिवीजन बेंच ने CBI से सवाल किया कि क्या उचित जांच के लिए सेमिनार रूम के अलावा अन्य जगहों को सील करना आवश्यक नहीं था। अंततः, कोर्ट ने CBI को स्पष्ट निर्देश दिए कि वह अस्पताल परिसर के भीतर उन सभी जगहों को तुरंत सील कर दे, जिनका इस घटना से संभावित रूप से कोई संबंध हो सकता है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 21 मई के लिए निर्धारित की है।
सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप
12 मई को जस्टिस राजशेखर मन्था की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद 15 मई को, कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने इस मामले को एक नई डिवीजन बेंच को सौंप दिया, जिसमें जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष शामिल थे। यह फैसला पीड़िता के परिवार द्वारा की गई मांगों के जवाब में सुनाया गया। परिवार लंबे समय से घटनास्थल का दौरा करने की अनुमति मांग रहा है और आरोप लगा रहा है कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है। CBI इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
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