पंजाब में नशा तस्करों को संरक्षण देना बंद करे AAP सरकार: सुनील जाखड़, लवप्रीत सिंह की मौत के मामले में 7 दिन का अल्टीमेटम

खबर सार :-

पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने नशा तस्करों पर कार्रवाई की मांग की। लवप्रीत सिंह की मौत के मामले में परिवार ने न्याय न मिलने का आरोप लगाया और सात दिन में कार्रवाई की मांग की।
पंजाब में नशा तस्करों पर कार्रवाई की मांग, सुनील जाखड़ ने सरकार को दिया का अल्टीमेटम

खबर विस्तार : -

चंडीगढ़: पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर नशे के मुद्दे को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार से नशीले पदार्थों की तस्करी में कथित रूप से शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उन्हें संरक्षण दिए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। जाखड़ ने लवप्रीत सिंह की मौत के मामले में परिवार को न्याय दिलाने और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

जाखड़ ने चेतावनी दी कि यदि अगले पांच से सात दिनों के भीतर मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो परिवार के साथ मिलकर कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा और मामला अदालत में ले जाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या गंभीर होती जा रही है और सरकार को इस पर ठोस कदम उठाने चाहिए।

लवप्रीत सिंह की मौत के मामले में परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

सुनील जाखड़ ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उनके साथ लवप्रीत सिंह की बहन अमनदीप कौर और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे। लवप्रीत सिंह 14 सितंबर को अबोहर में मृत पाए गए थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमनदीप कौर ने आरोप लगाया कि उनके भाई की हत्या नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों ने की और शव को झाड़ियों में फेंक दिया। परिवार ने कहा कि मामले में शिकायतें दर्ज कराने की कोशिशों के बावजूद अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला है।

नशे की खुलेआम बिक्री और धमकियां देने का आरोप

परिवार ने अपने इलाके में नशीले पदार्थों की कथित खुलेआम बिक्री पर चिंता जताई। उनका आरोप है कि नशा बेचने वाले लोग स्थानीय लोगों को धमकियां भी देते हैं, जिससे इलाके में भय का माहौल बना हुआ है। परिवार ने यह दावा भी किया कि इलाके में नाबालिगों के नशीले पदार्थों की बिक्री में शामिल होने की खबरें सामने आई हैं। जाखड़ ने इन आरोपों को गंभीर बताते हुए प्रशासन से मामले की गहन जांच करने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ केवल घोषणाएं करना पर्याप्त नहीं है। सरकार और पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हो और आम नागरिकों को सुरक्षा मिले।

CCTV फुटेज को लेकर भी उठाए सवाल

जाखड़ ने बताया कि अमनदीप कौर ने अपने स्तर पर मामले से संबंधित सीसीटीवी फुटेज एकत्र किया था और इसे पेन ड्राइव में पंजाब के डीजीपी को सौंपा था। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि फुटेज प्राप्त करने वाले लोगों को धमकाया गया और कार्रवाई करने के बजाय फुटेज डिलीट करवा दिया गया। हालांकि, फुटेज मिटाए जाने और धमकियां दिए जाने संबंधी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। इस संबंध में निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जाखड़ ने मांग की कि मामले से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज सहित उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराने और जांच को उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

नशा तस्करी रोकने के लिए जवाबदेही कहां?

सुनील जाखड़ ने पंजाब के डीजीपी की ओर से 28 अप्रैल 2025 को की गई उस घोषणा का भी जिक्र किया, जिसमें नशीले पदार्थों की बरामदगी से जुड़े मामलों में संबंधित पुलिस थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) की जवाबदेही तय करने की बात कही गई थी। उन्होंने सवाल उठाया, “यदि मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए जवाबदेही तय की गई थी, तो परिणाम कहां हैं?” जाखड़ के मुताबिक, नशा तस्करी पर नियंत्रण के लिए पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि नशे की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए घोषित नीतियों को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।

प्रेगाबालिन पर प्रतिबंध के पालन को लेकर चिंता

जाखड़ ने प्रेगाबालिन दवा की बिक्री और उसके नियमन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिला मजिस्ट्रेटों की ओर से प्रेगाबालिन पर प्रतिबंध संबंधी आदेश जारी किए जाने के बाद भी मेडिकल स्टोरों पर इन आदेशों के अनुपालन की जांच करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण करने और प्रतिबंध संबंधी आदेशों के पालन की स्थिति की समीक्षा करने की मांग की। प्रेगाबालिन एक ऐसी दवा है जिसका उपयोग मुख्य रूप से नसों से संबंधित दर्द, मिर्गी के कुछ मामलों और फाइब्रोमायल्जिया जैसी स्थितियों के उपचार में किया जाता है। इसके इस्तेमाल और बिक्री पर लागू नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी है।

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