शाहपुरा में शिक्षा सुधार का मंथन: द्विदिवसीय वाकपीठ संगोष्ठी में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, नवाचार और नई शिक्षा नीति पर जोर
खबर सार :-
शाहपुरा में आयोजित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय संस्था प्रधानों की द्विदिवसीय वाकपीठ संगोष्ठी में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नई शिक्षा नीति, डिजिटल शिक्षण, नवाचार और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विस्तृत मंथन हुआ।
खबर विस्तार : -
भीलवाड़ाः राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के संकल्प के साथ हुई। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नया खेड़ा (ग्राम पंचायत बोरड़ा बावरियान) के तत्वावधान में आयोजित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय संस्था प्रधानों की द्विदिवसीय सत्रारंभ वाकपीठ संगोष्ठी केवल औपचारिक बैठक तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह शिक्षा की गुणवत्ता, नवाचार, नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई।
विधायक ने किया संबोधित
शाहपुरा स्थित सेन समाज धर्मशाला में आयोजित इस संगोष्ठी में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, संस्था प्रधानों, जनप्रतिनिधियों तथा शिक्षकों ने सहभागिता करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नैतिक मूल्यों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। संगोष्ठी का उद्देश्य नए शैक्षणिक सत्र के लिए साझा रणनीति तैयार करना, विद्यालयों में बेहतर कार्य संस्कृति विकसित करना तथा शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक डॉ. लालराम बैरवा ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि एक शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तक का ज्ञान नहीं देता, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा किसी भी बच्चे के जीवन की सबसे मजबूत नींव होती है। यदि प्रारंभिक शिक्षा मजबूत होगी तो विद्यार्थियों का व्यक्तित्व भी सुदृढ़ होगा और देश का भविष्य भी उज्ज्वल बनेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राजकीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने संस्था प्रधानों से अपेक्षा की कि वे नए शैक्षणिक सत्र में केवल प्रशासनिक औपचारिकताओं तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार, तकनीक आधारित शिक्षण और प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत प्रगति पर विशेष ध्यान दें।
नई शिक्षा नीति पर हुई चर्चा
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) रामेश्वर प्रसाद जिनगर ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कराना नहीं, बल्कि जिम्मेदार और संस्कारित नागरिक तैयार करना भी है। उन्होंने विद्यालयों में अनुशासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, नियमित मूल्यांकन तथा सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संस्था प्रधान विद्यालय की धुरी होते हैं और उनके नेतृत्व से ही किसी विद्यालय की पहचान बनती है।
विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) जगजीतेंद्र ने नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, शैक्षणिक नवाचारों तथा प्रशासनिक दक्षता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज का शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक भी है। उन्होंने शत-प्रतिशत नामांकन, नियमित उपस्थिति तथा सीखने के परिणामों में सुधार के लिए विशेष प्रयास करने का आह्वान किया।
अनुभवों का हुआ आदान-प्रदान
वाकपीठ के संरक्षक एवं मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सत्यनारायण कुमावत ने संस्था प्रधानों से विद्यालयों में टीम भावना के साथ कार्य करने, शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग की योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब प्रत्येक विद्यालय लक्ष्य आधारित कार्य संस्कृति अपनाएगा और निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करेगा।
वाकपीठ अध्यक्ष सच्चिदानंद टेलर ने संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक नया शैक्षणिक सत्र शिक्षकों और संस्था प्रधानों के लिए नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का अवसर होता है। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजन अनुभवों के आदान-प्रदान, नई योजनाओं की जानकारी तथा बेहतर कार्यप्रणाली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दो दिवसीय संगोष्ठी के दौरान संस्था प्रधानों के बीच अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार, आधारभूत सुविधाओं का विकास, नामांकन बढ़ाने की रणनीति, ड्रॉपआउट रोकने के उपाय, भाषा एवं गणितीय दक्षता में सुधार, डिजिटल शिक्षा, सतत मूल्यांकन प्रणाली, विद्यालय प्रबंधन समितियों की भूमिका तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे। विशेषज्ञों और अधिकारियों ने इन विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन भी प्रदान किया।
अनेक जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
संगोष्ठी में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि वर्तमान समय में केवल पाठ्यक्रम पूरा कर देना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, नैतिक मूल्य, नेतृत्व क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी शिक्षा का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। संस्था प्रधानों ने अपने-अपने विद्यालयों में किए गए नवाचारों और सफल प्रयोगों को साझा किया, जिससे अन्य विद्यालयों को भी नई प्रेरणा मिली।
कार्यक्रम में पूर्व प्रधान गोपाल गुर्जर, राजेंद्र बोहरा, पंकज सुगंधी, महावीर सैनी एवं जितेंद्र पाराशर सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, पार्टी पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने शिक्षा के क्षेत्र में सामुदायिक सहयोग बढ़ाने तथा राजकीय विद्यालयों को उत्कृष्ट बनाने के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
अभी अतिथियों का व्यक्त किया आभार
संगोष्ठी में क्षेत्र के शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। पूरे आयोजन के दौरान शिक्षा सुधार, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को लेकर उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि शिक्षक, अभिभावक, प्रशासन और समाज मिलकर कार्य करें तो राजकीय विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल स्थापित कर सकते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजक राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नया खेड़ा परिवार की ओर से सभी अतिथियों, अधिकारियों, संस्था प्रधानों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने विश्वास जताया कि इस द्विदिवसीय वाकपीठ संगोष्ठी में हुए विचार-विमर्श और लिए गए संकल्प नए शैक्षणिक सत्र में विद्यालयों की कार्यसंस्कृति, शिक्षण गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास को नई गति प्रदान करेंगे।
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