Rajgir Malmas Mela: ब्रह्म मुहूर्त से पवित्र कुंडों में उमड़ी भीड़, पहले शाही स्नान में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
खबर सार :-
Rajgir Malmas Mela: बिहार के राजगीर में मलमास मेले में साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने शाही स्नान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शाही स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त से पवित्र स्नान कुंडों में भारी भीड़ जुटी। इस दौरान सुरक्षा व यातायात प्रबंधन के लिए पुलिस बल तैनात रहा।
खबर विस्तार : -
राजगीर: बिहार के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक शहर राजगीर में मलमास मेले का पहला 'शाही स्नान' बुधवार को आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के माहौल के बीच संपन्न हुआ। पुरुषोत्तमी एकादशी और स्वार्थ सिद्धि योग के शुभ संयोग के अवसर पर शाही स्नान ब्रह्म मुहूर्त में शुरू हुआ और दोपहर तक जारी रहा। इस आयोजन में विभिन्न अखाड़ों के साधुओं, संतों और महंतों के साथ-साथ देश और विदेश से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
जिला प्रशासन के अनुसार, इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। शाही स्नान की प्रत्याशा में राजगीर में श्रद्धालुओं और साधुओं का आगमन मंगलवार रात से ही शुरू हो गया था। सुबह होते-होते ब्रह्मकुंड और अन्य पवित्र स्नान कुंडों के आसपास श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गई थीं। श्रद्धालुओं को कतारों में व्यवस्थित किया गया और निर्धारित मार्गों से स्नान कुंडों तक पहुंचाया गया।
उदासीन अखाड़े के संतों ने किया उद्घाटन
शाही स्नान का औपचारिक उद्घाटन उदासीन अखाड़े के संतों द्वारा किया गया। इसके बाद विभिन्न अखाड़ों और धार्मिक संप्रदायों के साधु और संत स्नान शोभायात्रा में शामिल हुए, जिसमें पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान, औपचारिक ध्वज और बैनर तथा विजय के उद्घोष गूंज रहे थे। इस भव्य आयोजन में अनेक अखाड़ों के महंतों और संतों ने भाग लिया, जिनमें खाक चौक, बड़ी संगत, धनिया पहाड़ी संगत, रजौली संगत, कैलाश आश्रम, कबीर पंथी संप्रदाय, फलाहारी बाबा संप्रदाय और सखी संप्रदाय (झुंकिया बाबा सहित) के संत शामिल थे।

साधुओं और संतों के लिए विशेष व्यवस्था
जिला प्रशासन ने शाही स्नान में भाग लेने वाले साधुओं और संतों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की थीं। विभिन्न अखाड़ों से आए साधुओं के जत्थों को एक विशेष "रेड कॉरिडोर" के रास्ते सीधे ब्रह्मकुंड तक पहुंचाया गया। ब्रह्मकुंड परिसर आम जनता के लिए तभी खोला गया, जब साधु-संतों ने अपने 'शाही स्नान' की रस्में पूरी कर लीं।
श्रद्धालुओं ने पवित्र कुंडों में लगाई डुबकी
परंपरा के अनुसार, साधु-संतों का पहला स्नान 'गुरु नानक कुंड' में हुआ। इसके बाद, संतों का जुलूस सरस्वती नदी के किनारे-किनारे और 'सप्तधारा' से होते हुए मुख्य ब्रह्मकुंड तक पहुंचा, जहां पवित्र डुबकी लगाने और विशेष प्रार्थनाओं के साथ रस्में पूरी की गईं। श्रद्धालुओं ने भी पवित्र कुंडों में आस्था की डुबकी लगाई और अपने परिवारों की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए प्रार्थनाएं कीं।
मलमास मेले' का धार्मिक महत्व
राजगीर 'मलमास मेले' का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पूरे देश में बहुत ऊंचा माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि मलमास की अवधि के दौरान यहां स्थित पवित्र गर्म जल के कुंडों में डुबकी लगाने से मनुष्य अपने पापों से मुक्त हो जाता है और उसे आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था से प्रेरित होकर, लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस मेले में शामिल होते हैं, जिसका आयोजन हर तीन साल में एक बार किया जाता है।
देश-विदेश से आते श्रद्धालु
15 जून तक चलने वाले इस मेले में राजगीर के 22 पवित्र गर्म जल के कुंडों और 52 जल-धाराओं में पवित्र डुबकी लगाने का विशेष महत्व है। इस दौरान, कई धार्मिक रस्में और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें तीन 'शाही स्नान' भी शामिल हैं। इस मेले में न केवल बिहार समेत भारत के अलग-अलग राज्यों से, बल्कि नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों से भी साधु-संत और भक्त आते हैं।
भीड़ को लेकर पुलिस-प्रशासन अलर्ट
मेले में भारी भीड़ की आशंका को देखते हुए व्यापक सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था की गई थी। सभी प्रमुख स्नान स्थलों, पहुंच मार्गों और पूरे मेला क्षेत्र में पुलिस कर्मियों, मजिस्ट्रेटों और स्वयंसेवकों को तैनात किया गया था। शाही स्नान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक अखाड़े के साथ एक मजिस्ट्रेट और एक पुलिस अधिकारी को तैनात किया गया था।
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