नौकरी का झांसा देकर 50 लोगों को बनाया बंधक, झांसी में फर्जी कंपनी का भंडाफोड़, 8 गिरफ्तार
खबर सार :-
झांसी में नौकरी का झांसा देकर लोगों को बंधक बनाने वाले फर्जी कंपनी गिरोह का खुलासा। पुलिस ने 50 लोगों को मुक्त कराया और 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
खबर विस्तार : -
झांसी: नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर बेरोजगार युवक-युवतियों को अपने जाल में फंसाने और बाद में उन्हें बंधक बनाकर रखने वाले गिरोह का झांसी पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। साइबर थाना, बरुआसागर और बबीना पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए फर्जी कंपनी संचालित करने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से बंधक बनाए गए 50 महिला और पुरुषों को सकुशल मुक्त कराया है।
पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराध से संबंधित विभिन्न पोर्टलों पर मिली शिकायतों और पीड़ितों से प्राप्त सूचनाओं की जांच के दौरान फर्जी कंपनी के जरिए नौकरी का झांसा देकर लोगों को झांसी बुलाने और उनसे रकम वसूलने के बाद बंधक बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने गिरोह की गतिविधियों की निगरानी शुरू की।
बिजौली में चल रहा था फर्जी कंपनी का कार्यालय
पुलिस को सूचना मिली थी कि प्रेमनगर थाना क्षेत्र की बिजौली चौकी के अंतर्गत कृष्णा कॉम्प्लेक्स, एल्डिको राजगढ़ में M/S MAA LAXMI ASSOCIATE नाम से कार्यालय संचालित किया जा रहा है। आरोप है कि यहां बेरोजगार लोगों को नौकरी देने का झांसा देकर बुलाया जाता था। सूचना के आधार पर 5 सितंबर को संयुक्त पुलिस टीम ने कार्यालय पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्यालय में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मौजूद मिले। पुलिस के अनुसार, इन लोगों को गिरोह ने अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा था। सभी 50 लोगों को पुलिस ने सकुशल मुक्त कराया।
पहले 1,100, फिर नौकरी के नाम पर 30 हजार रुपये
प्रारंभिक पूछताछ में गिरोह के कथित काम करने का तरीका सामने आया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी बेरोजगार युवक-युवतियों को नौकरी का लालच देकर कार्यालय बुलाते थे। वहां एंट्री फॉर्म के नाम पर प्रत्येक व्यक्ति से पहले 1,100 रुपये लिए जाते थे। इसके बाद नौकरी शुरू कराने के नाम पर 25 हजार से 30 हजार रुपये तक नकद वसूले जाने का आरोप है। रकम देने के बाद भी लोगों को नेटवर्किंग और मल्टी लेवल मार्केटिंग से जोड़ने के नाम पर अतिरिक्त रकम देने के लिए दबाव बनाया जाता था।
परिचितों को फोन करवाकर बुलाते थे नए लोग
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य अपने कब्जे में रखे लोगों से उनके परिचितों और रिश्तेदारों को फोन करवाते थे। उनसे भी नौकरी का लालच देकर झांसी आने के लिए कहा जाता था। इस तरह एक पीड़ित के माध्यम से दूसरे लोगों को बुलाकर गिरोह अपना नेटवर्क बढ़ाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस तरीके से अब तक कितने लोगों को गिरोह ने अपने जाल में फंसाया है और उनसे कितनी रकम की वसूली की गई।
वाराणसी और लखनऊ में भी चला चुके थे कार्यालय
जांच में आरोपियों के पुराने ठिकानों की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य इससे पहले वाराणसी और लखनऊ में भी इसी तरह के कार्यालय संचालित कर चुके हैं। वहां पुलिस की कार्रवाई के बाद गिरोह के कुछ सदस्य गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद गिरोह के कुछ सदस्य करीब दो-तीन महीने पहले झांसी पहुंचे और किराये पर कार्यालय व प्रशिक्षण केंद्र लेकर फिर से इसी तरह की गतिविधियां शुरू कर दीं।
आठ मोबाइल और 8,300 रुपये नकद बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से आठ मोबाइल फोन और 8,300 रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा फर्जी कंपनी से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामान भी बरामद किया गया है। बरामद सामान में 52 स्टाम्प पेपर, छह रजिस्टर, पांच कॉपियां, छह डायरी, नौ प्रमाण-पत्र, आवेदन फार्म की नौ जिल्द, एक कैशबुक, तीन इन्क्वायरी बुक और एक TVS मोटरसाइकिल शामिल है।
राजस्थान और बिहार के रहने वाले हैं आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों में रामसिंह मीणा, लखन मेहता, बब्लू कुमार, आलोक कुमार, मोहित वर्मा, सुरेंद्र और नितेश समेत आठ लोग शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी राजस्थान और बिहार के अलग-अलग जिलों के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस इनके आपराधिक इतिहास और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
साइबर थाना में मुकदमा दर्ज, नेटवर्क की जांच जारी
मामले में साइबर थाना झांसी में मुकदमा संख्या 20/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने बीएनएस, आईटी एक्ट और प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (बैनिंग) एक्ट की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की है। पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन और दस्तावेजों की तकनीकी जांच करा रही है। साथ ही ठगी की कुल रकम, पीड़ितों की संख्या, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और फर्जी कंपनी के नेटवर्क के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।
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