झांसी मंडल में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग शुरू, मुस्तरा–गढ़मऊ–पारीछा रेलखंड पर बढ़ी लाइन क्षमता और सुरक्षा

खबर सार :-

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यात्रियों को मिलेगा। ट्रेनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होने से परिचालन में होने वाली देरी कम होगी, समयपालन बेहतर होगा और यात्रा अधिक सुरक्षित एवं विश्वसनीय बनेगी। साथ ही बढ़ी हुई लाइन क्षमता भविष्य में अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन का भी मार्ग प्रशस्त करेगी।
झांसी मंडल में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग शुरू, मुस्तरा–गढ़मऊ–पारीछा रेलखंड पर बढ़ी लाइन क्षमता और सुरक्षा

खबर विस्तार : -

झांसीः उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल ने रेल परिचालन को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मंडल के मुस्तरा–गढ़मऊ–पारीछा (14 किलोमीटर) रेलखंड पर अत्याधुनिक ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (एबीएस) प्रणाली का सफलतापूर्वक संचालन शुरू कर दिया गया है। इस नई तकनीक के लागू होने से अब इस रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन कम अंतराल पर भी पूरी सुरक्षा के साथ किया जा सकेगा। इससे लाइन क्षमता में वृद्धि होगी, ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु बनेगी और समय पालन में भी उल्लेखनीय सुधार आने की उम्मीद है।

ट्रैफिक प्रबंधन बनेगा बेहतर

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के निर्देशन में पूरी की गई। इसके क्रियान्वयन में प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता दीपक कुमार सिन्हा, मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार, मुख्यालय तथा झांसी मंडल की तकनीकी टीमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परियोजना का निर्माण कार्य कानपुर प्रोजेक्ट इकाई द्वारा निर्धारित समयसीमा में सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

रेलवे के अनुसार, ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली रेल परिचालन में आधुनिक तकनीक का महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रणाली के माध्यम से एक ही रेलखंड पर ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए कम समय अंतराल में अधिक ट्रेनों का संचालन संभव हो जाता है। इससे व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर होता है और परिचालन की दक्षता बढ़ती है।

परियोजना के तहत मुस्तरा, गढ़मऊ और पारीछा स्टेशनों पर पहले से स्थापित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली को अपग्रेड किया गया है। इस अपग्रेडेशन के बाद सिग्नलों का संचालन पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और सटीक हो गया है। नई प्रणाली किसी भी संभावित तकनीकी त्रुटि की संभावना को कम करते हुए ट्रेन संचालन को अधिक विश्वसनीय बनाती है।

मानवीय त्रुटियों की संभावना कम

सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए पूरे रेलखंड पर 82 मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर (एमएसडीएसी) लगाए गए हैं। यह आधुनिक उपकरण ट्रैक पर ट्रेनों की वास्तविक स्थिति का सटीक पता लगाते हैं, जिससे सिग्नलिंग प्रणाली को वास्तविक समय में जानकारी मिलती रहती है। इससे रेल परिचालन की विश्वसनीयता और सुरक्षा दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

इसके अलावा पूरे 14 किलोमीटर लंबे रेलखंड में 14 नए ऑटोमैटिक सिग्नल स्थापित किए गए हैं। इन सिग्नलों के माध्यम से ट्रेनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी और एक ट्रेन के आगे बढ़ते ही अगली ट्रेन को सुरक्षित रूप से आगे बढ़ने की अनुमति मिल सकेगी। इससे ट्रेनों की गति और परिचालन क्षमता दोनों में सुधार होगा।

परियोजना के अंतर्गत समपार फाटक संख्या 122 और 127 को भी ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली के अनुरूप गेट इंटरलॉकिंग से जोड़ा गया है। इस व्यवस्था से फाटक संचालन पूरी तरह सिग्नलिंग प्रणाली के साथ समन्वित रहेगा, जिससे रेल और सड़क यातायात दोनों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण सुधार होगा। इससे फाटक संचालन के दौरान मानवीय त्रुटियों की संभावना भी काफी कम हो जाएगी।

उत्तर मध्य रेलवे का मानना है कि मुस्तरा–गढ़मऊ–पारीछा रेलखंड पर ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली का सफल क्रियान्वयन भारतीय रेल के आधुनिकीकरण अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह परियोजना न केवल अत्याधुनिक तकनीक के उपयोग का उदाहरण है, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित, तेज और बेहतर रेल सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में झांसी मंडल की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

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