लखनऊ ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार: आरटीसी परियोजना के तहत 12 प्रमुख मार्गों पर तैनात किए गए सब-रूट मार्शल

खबर सार :-

लखनऊ में यातायात प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए आरटीसी परियोजना के तहत 25 रेसर मोबाइल्स को सब-रूट मार्शल के रूप में उन्नत किया गया है। पढ़ें पूरी खबर।
लखनऊ ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार, आरटीसी परियोजना लागू

खबर विस्तार : -

लखनऊ: यातायात के बढ़ते दबाव, रास्तों पर बदलती परिस्थितियों और अचानक आने वाले अवरोधों से अधिक व्यवस्थित ढंग से निपटने के लिए यातायात प्रबंधन की व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव किया गया है। “रिड्यूसिंग ट्रैफिक कॉन्‍जेशन” यानी आरटीसी परियोजना के अंतर्गत लखनऊ में यातायात नियंत्रण की संरचना को अब और अधिक मजबूत बनाया गया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह दावा करना बिल्कुल नहीं है कि हर परिस्थिति में जाम या अवरोध तुरंत खत्म हो जाएगा, बल्कि उपलब्ध बल और मोबाइल संसाधनों का वैज्ञानिक व उत्तरदायी उपयोग करना है ताकि समस्या की पहचान तेजी से हो सके।

मौजूदा समय में भारी बारिश, पानी भरने, सड़कों की चौड़ाई कम होने, वाहन खराब होने या अन्य आकस्मिक कारणों से कई जगहों पर ट्रैफिक पर असामान्य दबाव पड़ जाता है। ऐसी कठिन स्थितियों में आरटीसी व्यवस्था काफी मददगार साबित होती है क्योंकि इसका आधार किसी एक चौराहे पर खड़े रहने के बजाय लगातार क्षेत्र में घूमना और त्वरित कार्रवाई करना है।

इस तरह काम करेगी उन्नत सब-रूट मार्शल व्यवस्था

लखनऊ यातायात पुलिस के पास पहले से कुल 42 रेसर मोबाइल्स थीं जिन पर दो-दो कर्मी तैनात रहते थे। आरटीसी परियोजना के तहत इनमें से 25 रेसर मोबाइल्स को उन्नत करके 'सब-रूट मार्शल' इकाइयों में बदल दिया गया है। प्रत्येक ऐसी इकाई का नेतृत्व यातायात उप-निरीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा किया जा रहा है और उनके साथ एक यातायात आरक्षी भी तैनात रहता है।

शहर के 12 प्रमुख मार्गों को ट्रैफिक के भार और जरूरत के आधार पर बांटकर इन 25 सब-रूट मार्शल्स को लगाया गया है। ये अधिकारी किसी एक जगह पर स्थिर रहने के बजाय अपने पूरे उप-मार्ग पर लगातार गश्त करते हैं और स्थिति पर कड़ी नजर रखते हैं। किसी स्थान पर समस्या आने पर अधिकारी खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करते हैं और तुरंत जरूरी कदम उठाते हैं।

प्रतिदिन 70 से 100 किलोमीटर तक होगा क्षेत्रीय भ्रमण

इन मोबाइल इकाइयों का काम सिर्फ कागजी या औपचारिक गश्त करना नहीं है। हर सब-रूट मार्शल या रेसर मोबाइल अपने तय क्षेत्र में हर दिन लगभग 70 से 100 किलोमीटर तक का सफर तय करती है। इस लगातार मौजूदगी से टीमों को सड़क की वास्तविक स्थिति और अचानक आने वाली बाधाओं की जानकारी समय रहते मिल जाती है।

यातायात हेल्पलाइन, सोशल मीडिया, कंट्रोल रूम या फील्ड से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर सबसे पास मौजूद टीम को तुरंत संबंधित स्थान पर भेजा जाता है। इसके अलावा गश्त के दौरान यदि दल खुद किसी संभावित अवरोध को देखता है, तो मौके पर ही त्वरित हस्तक्षेप किया जाता है।

तीन स्तरों पर बंटी है नई यातायात संरचना

25 उन्नत सब-रूट मार्शल इकाइयों के अलावा बाकी बची हुई रेसर मोबाइल्स भी हजरतगंज, महानगर, गोमतीनगर, विभूतिखंड, वजीरगंज, कृष्णानगर, कैंट और चौक जैसे सभी यातायात सर्किलों में अपनी पुरानी भूमिका के साथ पूरी तरह सक्रिय हैं। इस प्रकार अब लखनऊ में यातायात प्रबंधन कुल तीन स्तरों पर काम कर रहा है: चौराहों पर स्थायी ड्यूटी, सर्किल स्तर पर रेसर मोबाइल्स, और प्रमुख मार्गों पर उप-निरीक्षक के नेतृत्व वाले सब-रूट मार्शल्स।

आरटीसी परियोजना की रूपरेखा और उद्देश्य

RTC यानी Reducing Traffic Congestion एक लक्षित यातायात प्रबंधन व्यवस्था है जिसे लखनऊ में यातायात के दबाव को बेहतर ढंग से संभालने के लिए तैयार किया गया है। इसके तहत भीड़भाड़ वाले मार्गों और संवेदनशील बिंदुओं पर निरंतर निगरानी रखी जाती है। इस पूरी संरचना का मुख्य उद्देश्य यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली को अधिक संगठित बनाना है ताकि सूचना मिलने पर कम से कम समय में सही संसाधनों को मौके पर भेजा जा सके और आम जनता के लिए यातायात प्रवाह को यथासंभव सुचारु किया जा सके।

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