झांसीः झांसी में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बदहाल स्थिति को लेकर एक बार फिर आवाज उठी है। बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानू सहाय के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिला अधिकारी के माध्यम से सौंपा गया। इस ज्ञापन में क्षेत्र की जर्जर चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
ज्ञापन में बताया गया कि बुंदेलखंड जैसे अति पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्र के लोगों के पास इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते हैं। ऐसे में यहां के लोग पूरी तरह से सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश, बुंदेलखंड के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी केंद्रों में चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और आवश्यक उपकरणों की भारी कमी बनी हुई है। इस कारण सक्षम लोग तो लखनऊ या दिल्ली जाकर इलाज करा लेते हैं, लेकिन गरीब और असहाय लोग इलाज के अभाव में अपनी जान गंवाने को मजबूर हो जाते हैं।
विशेष रूप से महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई गई है। यहां कुल 175 चिकित्सकों के पद सृजित हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 62 नियमित चिकित्सक ही कार्यरत हैं, जबकि 62 चिकित्सकों को संविदा पर रखा गया था। इनमें से भी कई चिकित्सकों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (बीआरएस) की मांग की है और कुछ रिटायरमेंट के करीब हैं। दूसरी ओर, संविदा चिकित्सकों के नवीनीकरण पर भी रोक लगा दी गई है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि हाल ही में 75 संविदा चिकित्सकों की भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए थे, लेकिन अंतिम तिथि तक आधे से भी कम आवेदन प्राप्त हुए। इससे स्पष्ट है कि यहां कार्य करने के लिए चिकित्सक भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। वर्तमान में आधे से भी कम स्टाफ के सहारे करीब तीन हजार मरीजों की ओपीडी संचालित की जा रही है, साथ ही ऑपरेशन और वार्ड की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर है।
इसके अलावा, क्लास-2, 3 और 4 के पदों के साथ-साथ आउटसोर्स कर्मचारियों के भी आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। मजबूरी में लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां इलाज के खर्च के कारण उन्हें अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ जाती है।
भानू सहाय ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर सरकार विकास के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर बुंदेलखंड की हकीकत बेहद खराब है। मेडिकल कॉलेज में केवल एक एमआरआई, एक सीटी स्कैन और दो अल्ट्रासाउंड मशीनें ही उपलब्ध हैं, जबकि करीब 20 करोड़ रुपये के उपकरणों की आवश्यकता है। अंत में मुख्यमंत्री से मांग की गई कि सभी रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए, अन्यथा आंदोलन करने की चेतावनी दी गई। इस दौरान कई अन्य कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
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