Bhilwara: आचार्य पुलकसागर महाराज का ने कर्म, कषाय और आत्मकल्याण का दिया संदेश

खबर सार :-

भीलवाड़ा में आचार्य पुलकसागर महाराज के पहली बार हो रहे चातुर्मास में धर्म और अध्यात्म की गंगा बह रही है। 15 से 30 अगस्त तक चित्रकूटधाम में ज्ञान गंगा महोत्सव होगा।
कर्मों का पलड़ा भारी हो तो बदल जाती है जिंदगी, : पुलकसागर महाराज

खबर विस्तार : -

भीलवाड़ाः राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ससंघ के भीलवाड़ा में पहली बार हो रहे चातुर्मास के दौरान शहर में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मेन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के तहत बुधवार को शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को जीवन, कर्म, कषाय और आत्मकल्याण का संदेश दिया।

आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में पाप और पुण्य का संतुलन उसके कर्मों से तय होता है। जिन लोगों का समय जिनवाणी सुनने, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना में व्यतीत होता है, उनके जीवन में पुण्य प्रबल होता है। इसके विपरीत जिनका अधिकांश समय केवल मौज-मस्ती और भौतिक गतिविधियों में बीतता है, उनके जीवन में पाप का प्रभाव बढ़ सकता है और जीवन की प्रतिकूलताएं भी बढ़ती जाती हैं। उन्होंने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं है, बल्कि यह आत्मनिरीक्षण, संयम और साधना का अवसर है। पुण्यशाली जीवों को ही जिनवाणी सुनने और धर्म का मार्ग समझने का अवसर प्राप्त होता है। मनुष्य के कर्म ही यह तय करते हैं कि वह भगवान बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा या अधोगति की ओर जाएगा।

कषाय को जीतने के लिए स्वभाव में लौटना जरूरी

आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य यदि कषाय को जीतना चाहता है तो उसे अपने वास्तविक स्वभाव में लौटना होगा। उन्होंने क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकारों को मनुष्य के आंतरिक पतन का कारण बताया।

उन्होंने कहा कि कसाई दूसरों को मारता है, लेकिन कषाय के कारण मनुष्य स्वयं अपने कई भव बिगाड़ लेता है। क्रोध और अहंकार व्यक्ति की विवेक शक्ति को कमजोर करते हैं, जबकि माया और लोभ उसे आत्मकल्याण के मार्ग से दूर ले जाते हैं। आचार्यश्री ने कहा कि यदि व्यक्ति के मन में मोक्ष की आकांक्षा है तो उसे निज मार्ग अपनाना होगा। यह ऐसा मार्ग होना चाहिए जो आत्मा के कल्याण की दिशा में ले जाए। जीवन को केवल बाहरी उपलब्धियों और भौतिक सुखों से सार्थक नहीं बनाया जा सकता। वास्तविक सार्थकता आत्मिक उन्नति में है।

15 से 30 अगस्त तक ज्ञान गंगा महोत्सव

आचार्य पुलकसागर महाराज ने श्रद्धालुओं से 15 से 30 अगस्त तक चित्रकूटधाम में आयोजित होने वाले ज्ञान गंगा महोत्सव में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य दुनिया को बदलने के बजाय स्वयं को बदलने की प्रेरणा देना होना चाहिए। उन्होंने बताया कि महोत्सव के दौरान परिवर्तन, चिंतन, जीवन को नई दिशा देने और स्वयं से मिलने की प्रेरणा देने वाले प्रवचन होंगे। सर्व समाज के लिए आयोजित इस महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट के साथ हुई। यह अवसर भागचंद, शशिकला, अनिल और अभिषेक अजमेरा परिवार, बसंत विहार को प्राप्त हुआ।

हेलिकॉप्टर से पहुंचे अशोक पाटनी

बुधवार दोपहर जैन समाज के प्रमुख भामाशाह एवं श्रेष्ठी अशोक पाटनी पत्नी सुशीला पाटनी के साथ निजी हेलिकॉप्टर से भीलवाड़ा पहुंचे। उन्होंने आचार्य पुलकसागर महाराज के दर्शन-वंदन किए और विभिन्न विषयों पर धर्म चर्चा कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा सहित समाज के प्रमुख पदाधिकारियों और श्रावकों ने पाटनी दंपती का स्वागत किया। अशोक पाटनी ने भीलवाड़ा में पहली बार हो रहे आचार्यश्री के चातुर्मास पर प्रसन्नता जताई और चातुर्मास समिति की सेवाओं की सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि यह चातुर्मास भीलवाड़ा में जिनशासन भक्ति का नया इतिहास रचेगा।

तेरापंथ समाज ने दिया मंगल प्रवचन का निमंत्रण

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि तेरापंथ संघ भीलवाड़ा के अध्यक्ष अशोक सिंघवी कमेटी सदस्यों और महिला मंडल के साथ आचार्यश्री के दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने श्रीफल भेंट कर तेरापंथ भवन में मंगल प्रवचन के लिए आचार्यश्री से निवेदन किया। इस दौरान विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों की ओर से भी आचार्यश्री के दर्शन और धर्म चर्चा का सिलसिला जारी रहा।

स्वतंत्रता दिवस पर होगा विशेष आयोजन

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि सर्व समाज के लिए आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव का शुभारंभ 15 अगस्त को दोपहर 2 बजे होगा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत संदेश के साथ विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी।

समिति के संयोजक मनीष शाह ने बताया कि महोत्सव में भीलवाड़ा के अलावा राजस्थान और देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। 15 अगस्त को आयोजन दोपहर 2 बजे से शुरू होगा, जबकि 16 से 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8:30 से 10 बजे तक प्रवचन होंगे।महोत्सव के दौरान 19 अगस्त को मोक्ष सप्तमी और 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष आयोजन किए जाएंगे।

सूर्यमहल में श्रद्धालुओं की भीड़

चातुर्मास समिति के सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि सूर्यमहल में प्रतिदिन सुबह 8:30 से 10 बजे तक गुरु दर्शन और धर्म संदेश के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा और आरती का आयोजन किया जा रहा है। इसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। ज्ञान गंगा महोत्सव की तैयारियों के साथ सूर्यमहल में चल रहे दैनिक धार्मिक कार्यक्रमों से भीलवाड़ा में चातुर्मास का आध्यात्मिक वातावरण लगातार गहरा रहा है। आयोजकों के अनुसार, आने वाले दिनों में महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है।

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