अयोध्या : उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों उबाल है। राजधानी लखनऊ में बीते दिनों 'मनरेगा बचाओ संग्राम' (Congress's Save MNREGA protest) के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज ने एक नई राजनीतिक चिंगारी सुलगा दी है। इस बर्बरता के विरोध में आज प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में गांधी पार्क, सिविल लाइंस में एक विशाल एकदिवसीय धरने का आयोजन किया गया। कांग्रेसियों का यह विरोध प्रदर्शन केवल लाठीचार्ज के खिलाफ नहीं था, बल्कि इसे केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार की 'गरीब विरोधी' और 'युवा विरोधी' नीतियों के खिलाफ एक बड़े जनांदोलन के रूप में देखा जा रहा है। सुबह से ही कांग्रेस कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां और झंडे लिए गांधी पार्क में जुटने लगे, जहाँ सरकार विरोधी नारों से माहौल पूरी तरह राजनीतिक रूप से चार्ज रहा।
धरना स्थल पर आयोजित सभा की अध्यक्षता कर रहे जिला अध्यक्ष चेतनारायण सिंह ने अपने संबोधन में तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वह पार्टी है जिसने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा, "कांग्रेस ने कभी अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके, तो ये वर्तमान सरकार क्या चीज़ है? हमने मनरेगा जैसी क्रांतिकारी योजनाएं दीं ताकि देश का गरीब सम्मान से जी सके। हमने युवाओं को रोजगार देने के लिए सरकारी तंत्र को मजबूत किया, लेकिन आज की सरकार उन योजनाओं को गला घोंट रही है।" सिंह ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब बर्दाश्त की सीमा समाप्त हो चुकी है। कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए तैयार है। उन्होंने साफ किया कि लाठी और गोली के दम पर गरीबों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
महानगर अध्यक्ष सुनील कृष्णा गौतम ने सत्ताधारी दल पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा देश और प्रदेश में केवल नफरत के बीज बोकर सत्ता सुख भोग रही है। उन्होंने कहा कि जिस साहस से हमारे पूर्वजों ने देश को आजाद कराया था, आज उसी साहस की जरूरत इस 'अघोषित तानाशाही' से मुक्ति पाने के लिए है। भाजपा सरकार को जनविरोधी नीतियों के कारण सत्ता से बेदखल करना ही अब कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य है।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे जिला प्रवक्ता शीतला पाठक ने राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता और युवाओं के बीच उनके प्रभाव को रेखांकित किया। पाठक ने कहा, "आज देश का युवा राहुल गांधी को एक 'आइकॉन' के रूप में देख रहा है। उनकी बढ़ती स्वीकार्यता से घबराकर भाजपा अपनी दूषित मानसिकता का प्रदर्शन कर रही है। उद्योगों को निजी हाथों में बेचना और जनकल्याणकारी योजनाओं का नाम बदलना इनकी फितरत बन चुकी है।"
पूर्व जिला अध्यक्ष राजेंद्र प्रताप सिंह ने कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि हमें उसी जज्बे की जरूरत है जो 1947 से पहले था। आज के दौर में भाजपा को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था से बाहर करना ही सच्ची देशभक्ति होगी। धरने को पूर्व जिला अध्यक्ष रामदास वर्मा, पीसीसी सदस्य उग्रसेन मिश्रा, राम अवध पासी और उमेश उपाध्याय जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि मनरेगा के बजट में कटौती और श्रमिकों के अधिकारों का हनन कांग्रेस कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के विभिन्न अनुषांगिक संगठनों ने भी अपनी पूरी ताकत झोंकी। सेवादल के जिला अध्यक्ष फ्लावर नकवी, महानगर अध्यक्ष बसंत मिश्रा, युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रामेंद्र त्रिपाठी, और दलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रामसागर रावत ने अपने-अपने विभागों के कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाला। महिला शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए महानगर अध्यक्ष नाजिश फातिमा ने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी से सबसे ज्यादा महिलाएं त्रस्त हैं और अब वे चुप नहीं बैठेंगी। इस एकदिवसीय धरने में मुख्य रूप से अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष मोहम्मद आमिर, दिनेश शुक्ला, कविंद्र साहनी, अशोक कनौजिया, पंकज सिंह और रामनाथ शर्मा शामिल रहे। साथ ही चंचल सोनकर, भीम शुक्ला, अशोक कुमार शर्मा, प्रेम पांडे, अनिल सोनकर, भोला भारती, आसाराम और जगत जैसे सक्रिय कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर यह साफ कर दिया कि कांग्रेस का जमीनी कार्यकर्ता अब सड़क पर उतर चुका है। सिविल लाइंस का यह धरना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति और अधिक गरमाने वाली है। लाठीचार्ज की घटना ने बिखरे हुए विपक्ष को एक साझा मुद्दा दे दिया है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या सफाई देती है या फिर दमन का यह चक्र इसी तरह जारी रहता है।
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